रायपुर। 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कही गई ‘दिमागी नक्सल’ वाली बात को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पाण्डेय ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं का ‘डीएनए’ ही ‘दिमागी नक्सली एसोसिएशन’ यानी ‘दिमागी नक्सली एसोसिएशन’ से जुड़ा हुआ है।
चिदंबरम और बीके हरिप्रसाद पर साधा निशाना
संतोष पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों को ‘दिमागी नक्सलियों’ से सतर्क रहने की अपील के बाद पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व प्रभारी बीके हरिप्रसाद द्वारा खुद को ‘दिमागी नक्सली’ बताए जाने पर कांग्रेस का कथित चेहरा सामने आ गया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने दशकों तक नक्सली हिंसा का दंश झेला है। इस दौरान हजारों ग्रामीणों, आदिवासियों और सुरक्षा बलों के जवानों ने अपनी जान गंवाई है। ऐसे में कांग्रेस के नेताओं की ओर से नक्सली विचारधारा से जुड़े बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
‘यह जवानों के बलिदान का अपमान’
भाजपा सांसद ने कहा कि जब देश का गृह मंत्री रह चुका व्यक्ति खुद को ‘दिमागी नक्सली’ कहता है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान बस्तर के जंगलों में तिरंगे की रक्षा के लिए शहीद हुए जवानों के बलिदान का अपमान हैं।
कांग्रेस पर ‘वैचारिक भाईचारे’ का आरोप
पाण्डेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और नक्सलियों के बीच वैचारिक और राजनीतिक संबंध कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि जब भी सुरक्षा बल नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं, कांग्रेस के नेता मानवाधिकार के नाम पर उनका बचाव करते नजर आते हैं।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अब कथित तौर पर ‘शहरी नक्सलियों’ और देशविरोधी ताकतों का राजनीतिक मोर्चा बन चुकी है।
‘लाल आतंक को जड़ से खत्म करने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध’
संतोष पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भाजपा सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि देश और छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस की इस राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी और आने वाले समय में उसे इसका जवाब देगी।
संतोष पाण्डेय के आरोपों के बीच विवाद का केंद्र यह है कि ‘दिमागी नक्सली’ टिप्पणी का मूल संदर्भ और संबंधित नेताओं के वास्तविक बयान क्या थे, क्योंकि उसी से राजनीतिक दावों की पुष्टि हो सकती है।





