नई दिल्ली। दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ (पहले नाम ‘पंजाब 95’) की रिलीज के बाद एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। करीब चार साल तक रिलीज का इंतजार करने के बाद फिल्म को पिछले शुक्रवार को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर अचानक रिलीज किया गया था, लेकिन महज 48 घंटे के अंदर ही फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
फिल्म के स्क्रीनराइटर निरेन भट्ट ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि फिल्म को हटाने के पीछे किसी सरकारी निर्देश का हाथ नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षों से फिल्म को लेकर आपत्तियां जताई जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
मेकर्स ने उठाए सवाल
निरेन भट्ट ने कहा कि अगर फिल्म को लेकर कोई आपत्ति है तो बातचीत होनी चाहिए, लेकिन बिना कोई वजह बताए फिल्म को हटाना सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेंसर बोर्ड या सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से कोई हस्तक्षेप हुआ है।
उन्होंने कहा कि फिल्म पूरी तरह एक मानवीय कहानी है, जो न्याय और मानवाधिकारों के मुद्दे पर आधारित है। फिल्म में किसी राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने की बात को उन्होंने खारिज किया।
कोर्ट जाने की तैयारी
फिल्म के मेकर्स ने अब कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है। निरेन भट्ट ने कहा कि वे कोर्ट में अपील करेंगे और जिस किसी को भी फिल्म से आपत्ति है, उसे कानूनी तौर पर कारण बताना होगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी कई फिल्मों को लेकर विवाद हुए हैं और अदालतों ने हस्तक्षेप कर समाधान निकाला है।
ZEE5 ने जारी किया था बयान
फिल्म हटाए जाने के बाद ZEE5 ने बयान जारी कर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण फिल्म भारत में फिलहाल उपलब्ध नहीं होगी। प्लेटफॉर्म ने कहा कि वह उचित प्रक्रिया के जरिए फिल्म को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने के प्रयास करेगा।
सरकार की ओर से सुरक्षा कारणों का हवाला
रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को लेकर सरकार की ओर से सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई थीं। बताया गया कि फिल्म को साल 2022 में सेंसर बोर्ड के पास ‘पंजाब 95’ नाम से भेजा गया था, जहां कई कट्स की मांग की गई थी।
मेकर्स ने इन कट्स को स्वीकार नहीं किया और बाद में फिल्म को नए नाम ‘सतलुज’ के साथ ओटीटी पर रिलीज किया गया।
फिल्म को लेकर क्या है विवाद?
फिल्म पंजाब के उथल-पुथल भरे दौर और मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। फिल्म में 1980-90 के दशक के दौरान कथित फर्जी मुठभेड़ों और गायब हुए लोगों के मामलों को दिखाया गया है।
फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में हैं।





