बिलासपुर। सीपत क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति गंभीर सवालों के घेरे में है। साल 2018 में तैयार किया गया 100 बिस्तरों का अस्पताल आज तक शुरू नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह भवन अब उपयोग के अभाव में खंडहर में बदलता जा रहा है।
करोड़ों का अस्पताल बना लेकिन चालू नहीं हुआ
सीपत में तैयार यह 100 बिस्तरों वाला अस्पताल क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी उम्मीद के रूप में बनाया गया था, लेकिन करीब 8 साल बाद भी यह अस्पताल शुरू नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक स्तर पर उदासीनता के कारण यह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
भवन की हालत जर्जर, रखरखाव पूरी तरह फेल
समय पर उपयोग न होने के कारण अस्पताल भवन की स्थिति लगातार खराब होती गई है। दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, खिड़कियां टूट चुकी हैं और पूरे परिसर में गंदगी फैली हुई है। देखरेख के अभाव में यह भवन धीरे-धीरे खंडहर में बदल चुका है।
असामाजिक तत्वों का कब्जा, परिसर बना तबेला
स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल परिसर पर अब असामाजिक तत्वों का कब्जा हो चुका है। यहां खुलेआम मवेशी बांधे जा रहे हैं और भवन को तबेले के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। रात के समय यहां संदिग्ध गतिविधियां होने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों को नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविध
अस्पताल शुरू न होने का सबसे बड़ा असर आसपास के हजारों ग्रामीणों पर पड़ रहा है। सामान्य इलाज के लिए भी लोगों को जिला अस्पताल या अन्य दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ता है। इससे समय और पैसे की बर्बादी के साथ-साथ कई बार मरीजों की हालत गंभीर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
अधिकारियों का तर्क: सेटअप स्वीकृत नही
अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के लिए अभी तक स्टाफ और सेटअप की स्वीकृति नहीं मिली है, जिसकी वजह से संचालन शुरू नहीं हो सका है। अब इस भवन के वैकल्पिक उपयोग पर विचार किया जा रहा है।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर भवन तैयार था तो इतने सालों में इसे चालू क्यों नहीं किया गया। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अस्पताल का उपयोग न होना प्रशासनिक लापरवाही और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।





