September 6, 2026

शर्मिष्ठा पनोली केस: हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार, कहा- अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब दूसरों की भावनाएं आहत करना नहीं

कोलकाता। इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार पुणे की 22 वर्षीय लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली की जमानत याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का लाइसेंस नहीं है। साथ ही राज्य सरकार को अगली सुनवाई में केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया गया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और सभी नागरिकों को अपनी अभिव्यक्ति में संयम बरतना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की, “हमें बोलने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचाएं।”

क्या है पूरा मामला?

शर्मिष्ठा पनोली पर आरोप है कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणियां की गईं। इस वीडियो के आधार पर कोलकाता में धार्मिक भावनाएं भड़काने सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी।

इसके बाद कोलकाता पुलिस ने उन्हें हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। स्थानीय अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

बचाव पक्ष ने क्या कहा?

पनोली की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने, गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने और जमानत देने की मांग की। उनका तर्क था कि एफआईआर में अपराध के पर्याप्त आधार नहीं हैं।

जेल में सुविधाओं को लेकर उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पनोली को जेल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और अन्य कैदियों से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मुवक्किल को किडनी संबंधी समस्या है और उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता है।

इस पर अदालत ने कहा कि उन्हें अन्य कैदियों की तरह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हर बंदी, चाहे वह किसी भी अपराध का आरोपी हो, उसे कानून के तहत निर्धारित अधिकार प्राप्त हैं।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भाजपा ने पश्चिम बंगाल सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है और गिरफ्तारी को पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बताया है। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं के कथित अपमान के आरोप में शिकायतकर्ता के खिलाफ भी असम में मामला दर्ज किया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पश्चिम बंगाल सरकार से सहयोग मांगा गया है।

फिलहाल स्थिति

  • हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार किया।
  • राज्य सरकार को अगली सुनवाई में केस डायरी पेश करने का निर्देश।
  • एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी की वैधता पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।
  • जेल में सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर भी अदालत ने राज्य से रिपोर्ट मांगी है।