March 4, 2026

PRSU रायपुर में श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ का लोकार्पण, राज्यपाल रमेन डेका की पहल

📍 Raipur News | Governor Ramen Deka Inaugurates Srimanta Shankardev Research Institute

रायपुर।
राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) रायपुर में महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित शोध संस्थान (शोध पीठ) का भव्य लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल (सह-सरकार्यवाह, RSS) सहित शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ एवं पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू के बाद दोनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थी एक-दूसरे के संस्थानों में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे।


🏛️ उत्तर-पूर्व और मध्य भारत की संस्कृति को जोड़ेगा शोध पीठ

राज्यपाल रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि—

“श्रीमंत शंकरदेव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, समानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं। यह शोध पीठ उत्तर-पूर्व और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक स्तर पर जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है।”

उन्होंने कहा कि यह शोध पीठ भारत की महान संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित अध्ययन का सशक्त केंद्र बनेगी। ऐसे अकादमिक प्रयास देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं।

राज्यपाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया।


🌼 श्रीमंत शंकरदेव का योगदान अमूल्य

राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव समाज सुधारक, शिक्षाविद, कलाकार, नाटककार, चित्रकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीतज्ञ और वैष्णव धर्म के प्रवर्तक थे।

उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठकर समरस समाज की कल्पना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से समानता, करुणा और उदारता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को मजबूत किया। उनके द्वारा रचित अंकिया नाट और बोरगीत भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा—

“पूज्य शंकरदेव का कार्यक्षेत्र भले ही असम रहा हो, लेकिन उनका प्रभाव पूरे देश पर पड़ा। उनके साहित्य, नाटक और भजन भारतीय संस्कृति का उद्घोष करते हैं। उन्होंने 500 वर्ष पहले ‘एक भारत’ का संदेश दिया, जिसे आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के रूप में साकार कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पूर्वजों के योगदान से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि एक सक्षम और समृद्ध भारत का निर्माण हो सके।


🎤 मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल का उद्बोधन

डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि असम विविधताओं से भरा प्रदेश है। विभिन्न जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का महान कार्य श्रीमंत शंकरदेव ने कृष्ण भक्ति के माध्यम से किया।

उन्होंने भक्ति साहित्य, नाट्य, गायन एवं गांव-गांव में नामघर की स्थापना कर सामाजिक सद्भाव को मजबूत किया और समाज को सांस्कृतिक रूप से जोड़ा।


🎓 शोध संस्थान बनेगा विचारों की कार्यशाला

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा—

“श्रीमंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता नहीं बल्कि संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। यह शोध संस्थान केवल भवन नहीं बल्कि विचारों की कार्यशाला बनेगा, जहां से निकले शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे।”


📚 शोध पीठ के उद्देश्य

✔ उत्तर-पूर्व व मध्य भारत के भक्ति आंदोलन पर शोध
✔ जनजातीय सांस्कृतिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण
✔ भाषा, साहित्य, इतिहास, समाजशास्त्र पर अध्ययन
✔ शोधार्थियों को शोधवृत्ति प्रदान करना
✔ भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाना


📰 मुख्य बिंदु

  • PRSU रायपुर में श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ का लोकार्पण
  • राज्यपाल रमेन डेका ने किया उद्घाटन
  • पंजाब विश्वविद्यालय और PRSU के बीच MOU
  • शोध पीठ को 2 करोड़ रुपये का बजट
  • भक्ति आंदोलन और संस्कृति पर केंद्रित अनुसंधान