बिलासपुर। अपनी ही नाबालिग सौतेली बेटी से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती बनाने वाले आरोपी को बिलासपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने अंतिम सांस तक कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल की अदालत ने मामले को जघन्य अपराध मानते हुए कहा कि आरोपी ने एक बच्ची के विश्वास, सुरक्षा और संरक्षण के अधिकार का गंभीर उल्लंघन किया है। अदालत ने पीड़िता को 7 लाख रुपए मुआवजा देने की भी अनुशंसा की है।
मामले के अनुसार, पीड़िता की मां का पहला पति कोरोना काल के दौरान उसे छोड़कर चला गया था। इसके बाद महिला ने आरोपी के साथ चूड़ी विवाह किया और दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे। आरोपी परिवार के साथ मुंबई चला गया, जहां वह एक निर्माणाधीन इमारत में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करता था।
15 जुलाई 2023 को आरोपी ने बच्ची को सुनसान भवन में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने मां को घटना बताने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने मां की हत्या करने और दोनों को बेसहारा छोड़ देने की धमकी दी। भय के कारण बच्ची चुप रही और आरोपी लगातार उसका यौन शोषण करता रहा।
मितानिन की सतर्कता से खुला राज
दिसंबर में परिवार रतनपुर लौट आया। आयुष्मान सर्वे के दौरान स्थानीय मितानिन स्मृति गोपाल ने बच्ची का पेट असामान्य रूप से फूला हुआ देखा। संदेह होने पर उन्होंने बच्ची की मां को अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी। सिम्स अस्पताल में सोनोग्राफी के बाद पता चला कि बच्ची आठ माह की गर्भवती है।
मामला पुलिस तक पहुंचने पर शुरुआती जांच में कुछ अन्य लोगों पर संदेह जताया गया, लेकिन तत्कालीन रतनपुर थाना प्रभारी रजनीश सिंह को सौतेले पिता पर शक हुआ। पुलिस ने नवजात और आरोपी के रक्त नमूने रायपुर स्थित राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजे, जहां डीएनए जांच में आरोपी के पिता होने की पुष्टि हुई।
डीएनए रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस की विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य और डीएनए रिपोर्ट ने अपराध को संदेह से परे साबित किया। कोर्ट ने इसे अत्यंत गंभीर और अमानवीय अपराध मानते हुए आरोपी को जीवन की अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई और पीड़िता के पुनर्वास के लिए 7 लाख रुपए मुआवजा देने की अनुशंसा की है.





