July 23, 2026

सुशासन तिहार में भाजपा नेता से बहसबाजी पड़ी भारी, जनपद CEO रूपेश पांडे निलंबित

दुर्ग। सुशासन तिहार के दौरान भाजपा नेता से कथित अभद्र व्यवहार और तीखी बहस के मामले में जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रूपेश पांडे पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश के बाद जारी नोटिस के जवाब को असंतोषजनक पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

प्रशासनिक आदेश के अनुसार महेंद्र कुमार जांगड़े को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

सुशासन तिहार में हुआ था विवाद

जानकारी के मुताबिक, थनौद गांव में आयोजित सुशासन तिहार 2026 के जनसमस्या समाधान शिविर के दौरान सामुदायिक भवन निर्माण की राशि जारी किए जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। भाजपा के दुर्ग ग्रामीण मंडल महामंत्री पुराण देशमुख ने इस संबंध में आपत्ति जताई थी।

भाजपा नेता का कहना था कि पूर्व सरपंच के कार्यकाल में सामुदायिक भवन निर्माण कार्य पर उन्होंने स्टे लगवाया था, ऐसे में वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में राशि जारी किए जाने का आधार क्या है। इस पर जनपद CEO रूपेश पांडे ने कहा कि स्टे हट चुका था, इसलिए राशि जारी की गई।

बहस का वीडियो हुआ था चर्चा का विषय

मामले को लेकर शिविर के दौरान भाजपा नेता और जनपद CEO के बीच तीखी बहस हो गई। आरोप है कि बहस के दौरान CEO रूपेश पांडे ने भाजपा नेता को उंगली दिखाते हुए कहा, “तेरे को जो करना है कर ले।”

यह पूरा घटनाक्रम दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में हुआ था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया और प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए CEO को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

जवाब असंतोषजनक, हुई निलंबन की कार्रवाई

नोटिस के जवाब की समीक्षा के बाद दुर्ग संभाग आयुक्त ने इसे असंतोषजनक माना और रूपेश पांडे के निलंबन का आदेश जारी कर दिया। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार का व्यवहार शासकीय गरिमा के अनुरूप नहीं है।

मुख्यमंत्री ने दिया स्पष्ट संदेश

इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता सर्वोपरि है और जनप्रतिनिधियों तथा नागरिकों के साथ अनुचित व्यवहार किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के सम्मान और अधिकारों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।