September 4, 2026

चीनी की बढ़ती कीमतों पर सियासत तेज, खड़गे ने मोदी सरकार से पूछा- 9 साल के निचले स्तर पर स्टॉक क्यों?

रायपुर/नई दिल्ली। त्योहारों से पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए चीनी के घटते स्टॉक, बढ़ती कीमतों और एथेनॉल नीति को लेकर सवाल उठाए हैं।

खड़गे ने सरकार से पूछे सवाल

मल्लिकार्जुन खड़गे ने सवाल किया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि देश को चीनी के निर्यात पर रोक लगाने और 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की स्थिति में क्यों पहुंचना पड़ा।

खड़गे ने दावा किया कि पिछले करीब तीन महीनों में चीनी की कीमतों में लगभग 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने त्योहारों से पहले बढ़ी कीमतों का बोझ आम जनता पर पड़ने को लेकर केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

एथेनॉल नीति पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने एथेनॉल नीति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब घरेलू बाजार में चीनी की कमी है और विदेशों से चीनी आयात करनी पड़ रही है, तो गन्ने और अनाज का इस्तेमाल E20 के लिए एथेनॉल बनाने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है।

खड़गे ने सवाल किया कि एक तरफ देश में चीनी का आयात किया जा रहा है और दूसरी तरफ गन्ने का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल बनाने में किया जा रहा है।

सरकार ने एथेनॉल नीति को बताया बेदखल

वहीं, केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है। सरकार के अनुसार कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे मिलों की ओर से दाम बढ़ाना, जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसे कारण प्रमुख हैं।

सरकार के मुताबिक मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 LMT था। ज्यादा बारिश और रेड रॉट तथा टॉप बोरर जैसी बीमारियों के कारण गन्ने की फसल प्रभावित होने की बात भी सरकार की ओर से कही गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़े चीनी के दाम

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का भी हवाला दिया है। 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 LMT चीनी की कमी रहने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई।

जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट

चीनी की कृत्रिम कमी और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने डीलर्स पर 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की है, जो 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। इसके अलावा स्टॉक की स्थिति की निगरानी के लिए केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं।

चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर अब कांग्रेस और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। जहां विपक्ष एथेनॉल नीति और स्टॉक में कमी को लेकर सरकार को घेर रहा है, वहीं सरकार कीमतों में वृद्धि के लिए जमाखोरी, सट्टेबाजी और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को जिम्मेदार बता रही है।