गरियाबंद। देवभोग क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 7 करोड़ रुपये के एनीकट निर्माण को मंजूरी दी है। एनीकट के निर्माण से तेल नदी में सालभर जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे योजना के तहत पेयजल आपूर्ति बाधित होने की आशंका समाप्त हो जाएगी।
सालभर मिलेगा पानी, बढ़ेगा भूजल स्तर
एनीकट बनने के बाद जलप्रदाय योजना के इंटेक वेल के आसपास सालभर पर्याप्त जलभराव बना रहेगा। इससे गर्मी के मौसम में भी तेल नदी से पर्याप्त पानी मिलता रहेगा। साथ ही क्षेत्र में भूजल स्तर रिचार्ज होगा और कृषि व उद्यानिकी कार्यों के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी संभव हो सकेगा।
जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार
जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप और जिला पंचायत सदस्य देशबंधु नायक ने मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह योजना देवभोग क्षेत्र के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। उन्होंने क्षेत्रवासियों की ओर से मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
क्या है सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना?
जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2024 में 8 करोड़ रुपये की लागत से इस योजना को मंजूरी मिली थी। इसके तहत तेल नदी से पानी लेकर सुपेबेड़ा में बन रहे ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा, जहां से 9 गांवों के 2074 परिवारों को प्रतिदिन 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना के लिए तेल नदी के किनारे 21 मीटर ऊंचा इंटेक वेल बनाया जा रहा है, जो सतही जल के साथ 9 मीटर गहराई तक उपलब्ध पानी को भी संग्रहित कर सकेगा। इसके बाद पानी का शुद्धिकरण कर 75 केएल क्षमता वाले ओवरहेड टैंक में संग्रहित किया जाएगा और पाइपलाइन के माध्यम से गांवों तक पहुंचाया जाएगा।
85 प्रतिशत काम पूरा
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार जलप्रदाय योजना का लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और वर्ष के अंत तक पेयजल आपूर्ति शुरू होने की संभावना है।
क्यों पड़ी एनीकट की जरूरत?
अधिकारियों के मुताबिक तेल नदी करीब छह महीने बहती है, लेकिन पर्याप्त भूजल केवल दो महीने तक ही उपलब्ध रहता है। बाकी समय नदी का बड़ा हिस्सा सूखी रेत में बदल जाता है। ऐसे में सालभर जलापूर्ति सुनिश्चित करना चुनौती बन गया था। पहले 2 करोड़ रुपये की लागत से एक वॉल का निर्माण किया गया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसके बाद स्थायी समाधान के रूप में एनीकट निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया।
300 मीटर लंबा और 3 मीटर ऊंचा होगा एनीकट
ईई सिंचाई एस.के. बर्मन के अनुसार प्रस्तावित एनीकट लगभग 300 मीटर लंबा और अधिकतम 3 मीटर ऊंचा होगा। इसका निर्माण डायफ्राम वॉल तकनीक से किया जाएगा, जिससे जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं ईई पीएचई विप्लव ध्रीतलहरे ने बताया कि एनीकट बनने के बाद जलापूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा भविष्य में अन्य प्रभावित गांवों तक योजना के विस्तार का रास्ता भी आसान होगा।





