नई दिल्ली। भारतीय न्याय व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के औपचारिक उपयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने “Regulations for Use of AI in Courts 2026” का ड्राफ्ट जारी किया है। शीर्ष अदालत ने इस मसौदे पर न्यायिक हितधारकों और आम नागरिकों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि AI को न्यायाधीशों की स्वतंत्र सोच और निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संवैधानिक मूल्यों, भाषाई विविधता और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप न्यायिक तकनीकी ढांचा विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
स्वदेशी AI सिस्टम पर काम
ऑक्सफोर्ड यूनियन और ऑक्सफोर्ड लॉ सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका के लिए एक स्वदेशी AI प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और तकनीक-सक्षम बनाना है।
AI नहीं लेगा जजों की जगह
CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा तकनीक को मानवीय निर्णय प्रक्रिया की सहायता के रूप में अपनाया है। उन्होंने दोहराया कि अंतिम निर्णय लेने की शक्ति न्यायाधीशों के पास ही रहेगी और AI केवल सहयोगी भूमिका निभाएगा।
युवा विधिक पेशेवर बन रहे बदलाव के सूत्रधार
मुख्य न्यायाधीश ने युवा वकीलों, न्यायिक अधिकारियों और विधिक विशेषज्ञों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे न्यायपालिका के तकनीकी परिवर्तन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके अनुसार, नई पीढ़ी तकनीक को तेजी से अपनाकर न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने में मदद कर रही है।
लंदन कार्यक्रम में हुआ था विरोध
गौरतलब है कि 4 जून को लंदन स्थित बर्कबेक यूनिवर्सिटी में AI और अंतरराष्ट्रीय कानून विषय पर CJI सूर्यकांत के व्याख्यान के दौरान कुछ प्रतिभागियों ने उनकी पूर्व टिप्पणी और भारत में असहमति की आवाजों को लेकर सवाल उठाए थे। कार्यक्रम के दौरान विरोध के चलते आयोजकों को हस्तक्षेप करना पड़ा था।





