नई दिल्ली। Supreme Court of India में सोमवार (20 अप्रैल 2026) को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान सख्त रुख देखने को मिला। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की याचिकाएं दायर करने पर उनकी सुप्रीम कोर्ट में एंट्री तक बंद की जा सकती है।
क्या थी याचिका?
याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती ने अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि
- स्वतंत्रता सेनानी Subhas Chandra Bose और उनकी Indian National Army (INA) को आधिकारिक रूप से भारत की आजादी का श्रेय दिया जाए
- नेताजी को “राष्ट्र पुत्र” घोषित किया जाए
- 23 जनवरी (जन्मदिवस) और 21 अक्टूबर (INA स्थापना दिवस) को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए
यह मामला CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आया था।
CJI की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब अदालत को पता चला कि याचिकाकर्ता पहले भी इसी तरह की याचिकाएं दाखिल कर चुका है, जिन्हें खारिज किया जा चुका है, तो CJI ने नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा, “आपका मकसद सिर्फ प्रचार पाना लगता है। रजिस्ट्री को निर्देश देंगे कि भविष्य में आपकी कोई PIL स्वीकार न की जाए।”
यहां तक कि अदालत ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसी याचिकाएं दोहराई गईं तो याचिकाकर्ता की सुप्रीम कोर्ट में एंट्री भी प्रतिबंधित की जा सकती है।
कोर्ट ने क्यों ठुकराई याचिका?
पीठ ने साफ किया कि इस तरह की मांगें न्यायपालिका के दायरे में नहीं आतीं।
- ऐतिहासिक घटनाओं की आधिकारिक व्याख्या या घोषणा करना अदालत का काम नहीं है
- यह विषय नीति और इतिहास से जुड़ा है, जिसे न्यायिक आदेश से तय नहीं किया जा सकता
कोर्ट ने इस तरह की याचिकाओं की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई और कहा कि भविष्य में ऐसी याचिकाओं पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
अदालत का स्पष्ट संदेश
Supreme Court of India ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का दायरा सीमित है और इसका इस्तेमाल प्रचार या गैर-जरूरी मुद्दों के लिए नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, यह याचिका खारिज कर दी गई है और अदालत ने ऐसे मामलों में सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं।





