March 3, 2026

कोयला घोटाला मामला: सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत, अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदला

रायपुर। कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। 28 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने ईओडब्ल्यू-एसीबी छत्तीसगढ़ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मामलों से संबंधित विभिन्न विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अभियुक्तों को पहले दी गई अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में परिवर्तित कर दिया है।

यह अंतरिम जमानतें ईओडब्ल्यू-एसीबी की विभिन्न प्राथमिकी और ईडी द्वारा दर्ज ईसीआईआर से संबंधित थीं, जिनमें कथित कोयला घोटाला और डीएमएफ मामलों के प्रकरण शामिल हैं। न्यायालय ने यह भी संज्ञान में लिया कि अभियुक्तों ने लंबी अवधि तक न्यायिक हिरासत भुगती है और अधिकांश मामलों में अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं, जबकि मुकदमे प्रारंभिक अवस्था में हैं।

इन मामलों में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया को बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ राज्य एजेंसियों और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज विभिन्न मामलों में उन्हें पहले अंतरिम जमानत दी गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए नियमित जमानत में बदल दिया है।

न्यायालय ने यह निर्देश दिया है कि अंतरिम जमानत के दौरान लगाई गई सभी शर्तें यथावत लागू रहेंगी। ये शर्तें सौम्या चौरसिया, रानू साहू, सूर्यकांत तिवारी और समीर विश्नोई पर लागू होंगी।

शर्तों के अनुसार अभियुक्तों को अपने पासपोर्ट न्यायालय में जमा करने होंगे और न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। विचारण लंबित रहने की अवधि के दौरान वे छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर निवास करेंगे और केवल सुनवाई की तिथि से एक दिन पूर्व, व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता होने पर ही राज्य में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही उन्हें संबंधित पुलिस थाने को संपर्क विवरण उपलब्ध कराना होगा और जांच में सहयोग करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला और डीएमएफ प्रकरणों से जुड़े अन्य सह-अभियुक्तों—हेमंत जायसवाल, चंद्र प्रकाश जायसवाल, संदीप कुमार नायक, वीरेंद्र कुमार जायसवाल (उर्फ मोंटू), रजनीकांत तिवारी, दीपेश टोंक, राहुल कुमार सिंह, शिव शंकर नाग, रोशन कुमार सिंह, शेख मोइनुद्दीन कुरैशी, परेख कुर्रे, लक्ष्मीकांत तिवारी, मनीष उपाध्याय, निखिल चंद्राकर, नवनीत तिवारी, राधेश्याम मिर्झा, वीरेंद्र कुमार राठौर, भुवनेश्वर सिंह राज, भरोसा राम ठाकुर, मनोज कुमार द्विवेदी और माया वेरियर—को पूर्व में दी गई जमानत भी जारी रखने का आदेश दिया है।

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि अधिकांश मामलों में अनुपूरक आरोप-पत्र या अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं और विचारण लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने यह दोहराया कि मुकदमे के प्रारंभिक चरण में, विशेष रूप से जब अभियुक्त लंबी अवधि तक हिरासत में रह चुके हों, निरंतर कारावास उचित नहीं है।

इसके अतिरिक्त, जयचंद कोशल से संबंधित एक नवीन प्रकरण को 29 जनवरी 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा न्यायालय में उपस्थित रहे।