Supreme Court Hearing On UGC New Rules 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। सवर्ण समाज और छात्र संगठनों द्वारा लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार समेत कई राज्यों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर नए नियमों का विरोध किया है।
UGC के नए भेदभाव विरोधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। यह मामला मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।
🔎 याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है?
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि UGC के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के साथ भेदभाव करते हैं।
नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समिति (Equity Committee) का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसमें OBC, SC, ST, महिला और दिव्यांग प्रतिनिधित्व जरूरी है, लेकिन सामान्य वर्ग को संभावित पीड़ित के रूप में शामिल नहीं किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे एकतरफा कार्रवाई का खतरा बढ़ेगा और नियमों के दुरुपयोग की आशंका है।
🪧 कई राज्यों में प्रदर्शन
UGC के नए नियमों के खिलाफ
- दिल्ली
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान
- बिहार
सहित कई राज्यों में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए हैं।
इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार निष्पक्षता से इन नियमों को लागू करेगी।
📜 क्या कहते हैं यूजीसी के नए नियम?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए नए नियम जारी किए।
इनके तहत:
- हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में 9 सदस्यीय समानता समिति बनेगी।
- हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र स्थापित होगा।
- SC, ST, OBC, EWS, महिलाएं और दिव्यांगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
- समिति की कम से कम 5 सीटें आरक्षित वर्ग, महिला और दिव्यांगों के लिए अनिवार्य होंगी।
यहीं से विवाद शुरू हुआ है।
⚠️ सवर्ण समाज की आपत्ति
विरोध करने वालों का कहना है कि समिति में सामान्य वर्ग के लिए कोई अनिवार्य प्रतिनिधित्व तय नहीं किया गया है।
उनका तर्क है कि
- बिना प्रतिनिधित्व के सामान्य वर्ग के छात्रों पर कार्रवाई हो सकती है।
- नियम यह मानकर चलते हैं कि एक वर्ग शोषक और दूसरा शोषित है।
- इससे कैंपस में अविश्वास बढ़ेगा।
- झूठी शिकायतों के जरिए परेशान किया जा सकता है।
🏛 UGC का पक्ष
UGC का कहना है कि ये नियम समानता और समावेशन को मजबूत करने के लिए लाए गए हैं।
UGC रिपोर्ट के अनुसार:
- 2019-20 में शिकायतें: 173
- 2023-24 में शिकायतें: 378
- 5 साल में कुल शिकायतें: 1160
- लगभग 118% की बढ़ोतरी हुई है।
आयोग का कहना है कि आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव गंभीर समस्या बन चुका है, जिसे रोकने के लिए मजबूत तंत्र जरूरी है।
🧭 आज की सुनवाई क्यों अहम है?
आज की सुनवाई से तय होगा कि
- नियमों पर रोक लगेगी या नहीं।
- प्रतिनिधित्व में बदलाव होगा या नहीं।
- छात्रों के विरोध का कानूनी समाधान क्या होगा।
देशभर की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है।





