March 3, 2026

Supreme Court Hearing On UGC New Rules: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, केंद्र को कमेटी बनाने का आदेश

नई दिल्ली न्यूज: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तत्काल प्रभाव से यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति (Committee) गठित करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।


⚖️ UGC New Rules पर क्यों लगी रोक?

दरअसल, यूजीसी के नए इक्विटी नियमों को लेकर देशभर में विरोध चल रहा है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दायर की गई थी, जिसमें नियमों की धारा 3C को चुनौती दी गई है।

याचिका में कहा गया है कि यह धारा जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन करती है। साथ ही सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों के हनन की आशंका भी जताई गई है।


👨‍⚖️ चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया नियमों की भाषा में स्पष्टता नहीं है।

सीजेआई ने केंद्र सरकार से कहा कि जब तक रेगुलेशन को दोबारा तैयार नहीं किया जाता, तब तक इसके संचालन पर रोक रहेगी।

उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से कहा—

“कृपया इस मामले की जांच के लिए कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति गठित करने पर विचार करें, ताकि समाज बिना किसी भेदभाव के साथ आगे बढ़ सके।”

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब भी तलब किया है।


📌 न्यायमूर्ति बागची का अहम तर्क

न्यायमूर्ति ज्योमाल्या बागची ने कहा कि भारत को अमेरिका जैसी स्थिति में नहीं जाना चाहिए, जहां कभी अश्वेत और श्वेत बच्चों के लिए अलग-अलग स्कूल होते थे।

उन्होंने कहा कि नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। इस पर सीजेआई ने भी सहमति जताई और कहा कि अदालत समानता के अधिकार पर गंभीरता से विचार कर रही है कि ये नियम उस कसौटी पर खरे उतरते हैं या नहीं।


⚔️ याचिकाकर्ता के वकील की दलील

याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि यूजीसी के नियम समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अधिसूचना की धारा 3C में SC, ST, OBC के खिलाफ जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा दी गई है, जबकि जनरल कैटेगरी को पूरी तरह बाहर रखा गया है।

उनका तर्क था कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के खिलाफ है और पूरी तरह भेदभावपूर्ण है।


📅 अब आगे क्या होगा?

✔ UGC के नए नियमों पर फिलहाल रोक
✔ केंद्र सरकार बनाएगी समीक्षा समिति
✔ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा
✔ अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी