September 4, 2026

छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI को सौंपी जांच; परिवार को ₹25 लाख मुआवजा

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय श्रवण की हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है।

दो साल से अधिक समय तक FIR नहीं होने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि श्रवण की मौत के बाद दो साल से अधिक समय तक पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं किया जाना गंभीर मामला है। कोर्ट ने न्याय के हित में जांच CBI को सौंपना जरूरी बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।

₹1,200 की शराब रखने के आरोप में हिरासत में लिया गया था

जानकारी के मुताबिक श्रवण को 18 जनवरी 2024 को कथित तौर पर 1,200 रुपये की शराब रखने के मामले में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद 21 जनवरी 2024 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

जुलाई 2024 में हुई न्यायिक जांच में सामने आया था कि हिरासत के दौरान ब्लंट हथियार से सिर में लगी चोट के कारण श्रवण की मौत हुई थी। हालांकि, इस मामले में FIR काफी देर बाद 30 जुलाई 2026 को दर्ज की गई।

परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था श्रवण

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम मुआवजे का आदेश देते हुए कहा कि श्रवण अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया हिरासत के दौरान हुई हिंसा को उसकी अप्राकृतिक मौत से जोड़ते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI जांच के निर्देश दिए।

13 अक्टूबर तक CBI को देनी होगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को मामले की जांच तेजी से पूरी कर 13 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। वहीं छत्तीसगढ़ के DGP को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर CBI निदेशक को सौंपने का आदेश दिया गया है।

अब CBI जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हिरासत के दौरान श्रवण के साथ क्या हुआ और उसकी मौत के लिए कौन जिम्मेदार था।