July 23, 2026

सुप्रीम कोर्ट से कारोबारी विजय केला को बड़ी राहत, CBI की FIR और चार्जशीट रद्द

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कारोबारी विजय कुमार केला को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी अपील स्वीकार करते हुए सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि बैंक लोन खाते का निपटारा आपसी सहमति से हो चुका है और उस पर डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) की मंजूरी भी मिल चुकी है, तो उसके बाद कर्जदार के खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि व्यावसायिक विवादों के निपटारे के बाद भी यदि आपराधिक मुकदमे जारी रखे जाएंगे तो इसका देश की आर्थिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और लोग बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) करने से बचेंगे।

मामला रायपुर निवासी विजय कुमार केला और उनकी फर्म मेसर्स मोहन ट्रेडर्स से जुड़ा है। फर्म का संचालन उनके बड़े भाई स्वर्गीय परमानंद केला करते थे। फर्म ने यूको बैंक से ऋण लिया था, जो वर्ष 2009 तक बढ़कर करीब 8 करोड़ रुपये हो गया। ऋण के बदले रायपुर के अमलीडीह और बोरियाखुर्द स्थित संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं। नवंबर 2009 में परमानंद केला के निधन के बाद कारोबार प्रभावित हुआ और ऋण की किस्तें जमा नहीं हो सकीं। इसके बाद बैंक ने 31 दिसंबर 2010 को खाते को एनपीए घोषित कर दिया।

बकाया राशि की वसूली के लिए मामला डीआरटी जबलपुर में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। 6.49 करोड़ रुपये की बकाया राशि के बदले 4.25 करोड़ रुपये में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट तय किया गया और मामले का निपटारा हो गया।

हालांकि खाता बंद होने के करीब ढाई वर्ष बाद फरवरी 2018 में यूको बैंक के जोनल हेड ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ऋण सीमा बढ़वाने के लिए फर्जी ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी और बैंक के पास मूल्यवान संपत्तियों की जगह अतिक्रमित जमीन गिरवी रखी गई थी। इसके आधार पर सीबीआई ने मामला दर्ज कर विशेष अदालत रायपुर में चार्जशीट पेश की थी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद विजय केला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने माना कि जब ऋण विवाद का विधिवत निपटारा हो चुका है और संबंधित पक्ष समझौते पर सहमत हैं, तब उसी मामले में आपराधिक कार्रवाई जारी रखना उचित नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत की कार्यवाही को निरस्त कर दिया।