July 30, 2026

सुशासन तिहार बना बदलाव की मिसाल, अपर्णा डे से लेकर ज्योति मिरी तक को मिली आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रहा है। समाधान शिविरों के जरिए शासन की योजनाएं सीधे लोगों तक पहुंच रही हैं, जिससे महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के माध्यम से राज्य सरकार जनसमस्याओं के समाधान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का नया उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। तालापारा और हेमुनगर में आयोजित समाधान शिविरों ने कई हितग्राहियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।

इनमें ज्योति मिरी और अपर्णा डे जैसी महिलाओं की कहानियां विशेष रूप से प्रेरणादायक हैं। वर्षों तक सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने वाली ये महिलाएं अब शासकीय सहायता के बल पर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।

स्वनिधि योजना से बदली ज्योति मिरी की जिंदगी

सब्जी व्यवसाय से जुड़ी ज्योति मिरी प्रतिदिन बाजार से सब्जियां खरीदकर मोहल्लों में बिक्री करती थीं। पूंजी की कमी के कारण वे सीमित मात्रा में सामान खरीद पाती थीं, जिससे उनकी आय भी सीमित रहती थी। सुशासन तिहार के समाधान शिविर में उन्हें प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की जानकारी मिली और आवेदन के बाद आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।

अब ज्योति अधिक मात्रा में सब्जियां खरीदकर अपने व्यवसाय का विस्तार कर रही हैं। उनके अनुसार यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं बल्कि आत्मनिर्भर बनने की नई शुरुआत साबित हुई है।

अपर्णा डे के हुनर को मिला नया अवसर

सिलाई कार्य में दक्ष अपर्णा डे लंबे समय से अपने घर से सिलाई सेंटर संचालित कर रही थीं। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें कई बार काम छोड़ना पड़ता था। समाधान शिविर में मिली स्वनिधि योजना की सहायता से अब वे नई मशीनें खरीदने और अपने व्यवसाय को विस्तार देने की तैयारी कर रही हैं।

उनका मानना है कि इस सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती प्रदान की है और अब वे अधिक व्यवस्थित तरीके से रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

दिव्यांगजनों को मिली स्वतंत्रता की नई राह

हेमुनगर में आयोजित समाधान शिविर में 80 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। यह पहल केवल आवागमन की सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि लाभार्थियों के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को भी नई शक्ति मिली।

वीणा सिंह के लिए बनी नई आजादी

बिरकोना निवासी वीणा सिंह, जो एक निजी नौकरी करती हैं, पहले रोजमर्रा के आवागमन के लिए दूसरों पर निर्भर थीं। मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल मिलने के बाद वे अब अपने कार्यस्थल और अन्य स्थानों तक स्वतंत्र रूप से पहुंच पा रही हैं। इससे उनके आत्मविश्वास और सम्मान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

राजीन कुर्रे का कारोबार हुआ आसान

मस्तूरी की राजीन कुर्रे सिलाई कार्य के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। व्यवसाय के लिए आवश्यक सामग्री लाने में उन्हें पहले काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ट्राईसाइकिल मिलने के बाद उनका काम आसान हो गया है और वे अपने व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित कर पा रही हैं।

सतरूपा बंजारे की शिक्षा को मिली रफ्तार

कोटा विकासखंड की कक्षा 11वीं की छात्रा सतरूपा बंजारे के लिए मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल किसी वरदान से कम नहीं है। स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानियां दूर होने के बाद अब वे अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पा रही हैं और भविष्य के सपनों को पूरा करने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

हेमुनगर और तालापारा के समाधान शिविरों से लाभान्वित अपर्णा डे, ज्योति मिरी, वीणा सिंह, राजीन कुर्रे और सतरूपा बंजारे जैसे हितग्राही आज प्रदेश में हो रहे सकारात्मक बदलाव के प्रतीक बन गए हैं। उनकी सफलता की कहानियां दर्शाती हैं कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकता है।