July 23, 2026

सुशासन तिहार शिविर में उठे गंभीर सवाल: सचिव समायोजन, पीएम आवास में देरी और बिजली बिल विवाद से घिरा प्रशासन

मुंगेली। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन तिहार के तहत नगर पंचायत जरहागांव में आयोजित शिविर में कई ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जिन्होंने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिविर में सचिव के कथित समायोजन, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ में देरी और बिजली बिल गड़बड़ी से जुड़े मामलों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

सचिव समायोजन को लेकर जांच की मांग

शिविर में प्रांशु कुमार नामक युवक ने आवेदन देकर ग्राम पंचायत सचिव विकास साव के नगर पंचायत जरहागांव में कर्मचारी के रूप में समायोजन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी होते हैं, जबकि नगर पंचायत नगरीय प्रशासन विभाग के अधीन संचालित होती है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस शासनादेश, नियम या वैधानिक प्रक्रिया के तहत यह समायोजन किया गया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि बिना खुली भर्ती प्रक्रिया के किसी पद पर समायोजन की खबर से बेरोजगार युवाओं में असंतोष है। स्थानीय स्तर पर इसे कथित “बैकडोर एंट्री” के रूप में देखा जा रहा है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पीएम आवास स्वीकृत, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं

शिविर में नगर पंचायत जरहागांव निवासी रामकुमार ध्रुव ने प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई। अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले रामकुमार ध्रुव का आरोप है कि उनका आवास लगभग तीन माह पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ करने के लिए आवश्यक कार्य आदेश या भवन अनुज्ञा जारी नहीं की गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कभी जमीन संबंधी आपत्ति तो कभी अन्य कारण बताकर उन्हें लगातार कार्यालयों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि स्वीकृति मिलने के बावजूद उन्हें योजना का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। बरसात का मौसम नजदीक होने के कारण उनकी चिंता और बढ़ गई है।

एक साल बाद भी नहीं सुलझा बिजली बिल का मामला

नगर पंचायत निवासी पूर्णिमा जायसवाल ने भी शिविर में अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च 2025 में गलत मीटर रीडिंग दर्ज होने के कारण उनके नाम पर 52 हजार रुपये से अधिक का बिजली बिल जारी कर दिया गया था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने बिजली विभाग और कलेक्टर जनदर्शन में कई बार शिकायत की, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर त्रुटि स्वीकार किए जाने के बावजूद बिल संबंधी परेशानी जारी है। उन्होंने वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी करने की मांग की है।

जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें

सुशासन तिहार शिविर में सामने आए इन मामलों ने स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बहस छेड़ दी है। सचिव समायोजन की वैधता, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी को लाभ मिलने में देरी और बिजली बिल विवाद अब प्रशासन के संज्ञान में पहुंच चुके हैं।

मामले में अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी ने कहा है कि सभी शिकायतें प्राप्त हो गई हैं। प्रत्येक बिंदु की जांच कराई जाएगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब क्षेत्रवासियों की नजरें प्रशासनिक जांच और उसके परिणामों पर टिकी हुई हैं।