May 14, 2026

ताड़मेटला नक्सली हमले के सभी आरोपी बरी, डिप्टी CM विजय शर्मा बोले- अभी न्यायालय का दरवाजा बाकी

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित ताड़मेटला नक्सली हमले के मामले में सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के दोषमुक्ति आदेश को बरकरार रखा। मामले को लेकर डिप्टी सीएम विजय शर्मा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि अभी न्यायालय का दरवाजा बाकी है।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि यह प्रकरण पहले लोअर कोर्ट में प्रस्तुत हुआ था, जहां कन्विक्शन नहीं हो पाया। इसके बाद विभिन्न कारणों से पुलिस और प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई, लेकिन वहां भी कन्विक्शन नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि अभी न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

दरअसल, 6 अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव के जंगल में नक्सलियों ने सीआरपीएफ और पुलिस बल पर बड़ा हमला किया था। सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन के उप कमांडर सत्यवान सिंह अपनी टीम के साथ एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग पर निकले थे। इसी दौरान नक्सलियों ने पुलिस बल पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस हमले में 76 जवान शहीद हो गए थे। घटना की रिपोर्ट चिंतागुफा थाने में दर्ज की गई थी।

मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि निचली अदालत का फैसला अवैध और अस्थिर है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी बरसे लखमा का धारा 164 सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया इकबालिया बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य है। साथ ही घटनास्थल से बरामद पाइप बम, विस्फोटक और अन्य सामग्री को भी अहम सबूत बताया गया।

हालांकि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों को हत्या और हमले की घटना से जोड़ने के लिए पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने कहा कि किसी प्रत्यक्षदर्शी ने आरोपियों की पहचान नहीं की। साथ ही धारा 164 के तहत दिए गए कथित इकबालिया बयान का भी स्वतंत्र साक्ष्यों से समर्थन नहीं मिला।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जब्त विस्फोटक सामग्री के संबंध में एफएसएल रिपोर्ट पेश नहीं की गई और जांच में कई गंभीर खामियां थीं। महत्वपूर्ण गवाहों की पहचान और जांच नहीं हुई। फोरेंसिक और तकनीकी साक्ष्य भी पर्याप्त नहीं थे। डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए सभी आरोपियों की दोषमुक्ति बरकरार रखी। इस मामले में ओयामी गंगा, माडवी दुला, पोदियामी हिड़मा, ओयामी हिड़मा, कवासी बुथरा, हुर्रा जोगा, बरसे लखमा, मड़कम गंगा, राजेश नायक और करतम जोगा को आरोपी बनाया गया था।

वहीं अर्बन नक्सलियों पर हो रही कार्रवाई को लेकर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद एटीएस में पहली एफआईआर दर्ज हुई है। ऐसी गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

सुशासन तिहार को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर उन्होंने कहा कि सरकार जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान कर रही है। विधायक, सांसद और मंत्री लगातार प्रवास कर रहे हैं और योजनाओं का असर जमीन पर दिख रहा है।

इसके अलावा बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर विजय शर्मा ने कहा कि बंगाल में जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है और भाजपा कार्यकर्ताओं ने अथक मेहनत की है।