March 3, 2026

तिरुप्पुर में बड़ी आतंकी साज़िश नाकाम, ISI लिंक के शक में 8 संदिग्ध गिरफ्तार

तिरुप्पुर में बड़ी आतंकी साज़िश का खुलासा, 8 संदिग्ध गिरफ्तार

नई दिल्ली/तिरुप्पुर: देश की सुरक्षा एजेंसियों ने तमिलनाडु के तिरुप्पुर ज़िले में संयुक्त कार्रवाई करते हुए 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन आरोपियों के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) और बांग्लादेश के आतंकी संगठनों

जुड़े हो सकते हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई खुफिया इनपुट के आधार पर की गई। सभी आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है, जहां केंद्रीय एजेंसियां उनसे गहन पूछताछ करेंगी।

सोशल मीडिया पोस्ट से खुला नेटवर्क

दिल्ली पुलिस की क्यू सेल को आतंकवाद विरोधी जांच के दौरान सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध पोस्ट मिले थे। इन पोस्ट में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों के समर्थन में कंटेंट साझा किया गया था। डिजिटल ट्रैकिंग और तकनीकी निगरानी के बाद पता चला कि इन गतिविधियों का कनेक्शन तिरुप्पुर से जुड़ा हुआ है।

इसके बाद एक विशेष टीम तमिलनाडु पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी की गई।

गारमेंट यूनिट्स से गिरफ्तारी

गिरफ्तार किए गए संदिग्धों को तिरुप्पुर जिले के उथुकुली (2), पल्लडम (3) और तिरुमुरुगनपूंडी (1) स्थित गारमेंट यूनिट्स से पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि आरोपी यहां काम करने के बहाने रह रहे थे और अपनी असली पहचान छिपा रहे थे।

छापेमारी के दौरान 8 मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। इन डिवाइसों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि नेटवर्क, फंडिंग और विदेशी संपर्कों की पूरी कड़ी सामने आ सके।

फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपियों के पास फर्जी आधार कार्ड थे। अधिकारियों को शक है कि इन दस्तावेजों के जरिए वे भारत में अवैध रूप से रह रहे थे।

गिरफ्तार संदिग्धों में कुछ बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन्हें फर्जी पहचान पत्र और सिम कार्ड कैसे उपलब्ध कराए गए।

बड़ी वारदात की थी तैयारी?

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर कई शहरों की रेकी की थी। जांच एजेंसियों को शक है कि वे किसी बड़ी वारदात की साज़िश रच रहे थे। हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी विशेष लक्ष्य की पुष्टि नहीं की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी नेटवर्क सक्रिय किया जा रहा था और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार किया जा रहा था।

आगे क्या?

सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पूछताछ की जाएगी। राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर कई एजेंसियां संयुक्त रूप से इस मामले की जांच कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और बड़े खुलासे हो सकते हैं। देशविरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।