कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद All India Trinamool Congress के भीतर सियासी संकट गहराता जा रहा है। पार्टी के बागी गुट ने सोमवार को कोलकाता में आयोजित विशेष बैठक के बाद बड़ा दावा करते हुए Mamata Banerjee को पार्टी के चेयरपर्सन पद से हटाने और वरिष्ठ नेता Arup Roy को नया चेयरपर्सन चुनने की घोषणा कर दी है।
बागी गुट का नेतृत्व कर रहे Ritabrata Banerjee ने दावा किया कि उनकी बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी और उनका गुट ही “असली टीएमसी” है।
ममता को दिया मुख्य सलाहकार बनने का प्रस्ताव
ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रति नरम रुख दिखाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो बागी गुट की “मुख्य सलाहकार” बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई असली और नकली की नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य की है।
अभिषेक बनर्जी को किया निलंबित
बागी गुट ने खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हुए Abhishek Banerjee को निलंबित करने का भी ऐलान किया है। साथ ही नई कार्यसमिति और समानांतर नेतृत्व संरचना की घोषणा की गई है।
20 सांसदों की बगावत से बढ़ा संकट
पार्टी संकट उस समय और गहरा गया जब टीएमसी के 20 सांसदों के बागी गुट के साथ जाने और अलग राजनीतिक मोर्चा बनाने की खबरें सामने आईं। इसी मुद्दे पर टीएमसी नेतृत्व ने लोकसभा अध्यक्ष से इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी की है।
विधायकों का समर्थन होने का दावा
बागी गुट का दावा है कि उसे बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इससे पहले भी ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के लिए दर्जनों विधायकों ने समर्थन पत्र दिया था, जिससे पार्टी में विभाजन खुलकर सामने आ गया था।
ममता खेमे का जवाब
बगावत के बीच ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए नई राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा की है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन को पुनर्गठित कर संकट से उबरा जाएगा।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है। अब सभी की नजर निर्वाचन आयोग और आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हुई है।





