रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित सांसद संकुल विकास परियोजना की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह परियोजना जनजातीय विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने की ठोस पहल की जा रही है, जिससे जनजातीय क्षेत्रों से पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय बहुल क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सांसद संकुल विकास परियोजना के अंतर्गत गांवों के क्लस्टर (संकुल) बनाकर एक समग्र विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
कृषि, पशुपालन और वनोपज से बढ़ेगी ग्रामीण आय
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां धान की कई किस्में हैं, जिनके निर्यात की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने बताया कि कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन, बकरी पालन, गौ पालन और शूकर पालन को बढ़ावा देकर ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।
साथ ही, जनजातीय समुदायों द्वारा पारंपरिक रूप से उत्पादित महुआ, इमली, चिरौंजी जैसी वनोपज का वैल्यू एडिशन कर बाजार से जोड़ा जा रहा है, जिससे आय में वृद्धि होगी।
नई उद्योग नीति में SC-ST उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य की नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने सांसद संकुल विकास परियोजना से जुड़े जनप्रतिनिधियों और विकास सहयोगियों से आग्रह किया कि जनजातीय क्षेत्रों को नई उद्योग नीति का पूरा लाभ सुनिश्चित किया जाए।
परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी।
आठ राज्यों में समन्वित प्रयास से हो रहा समग्र विकास
बैठक में वी. सतीश ने सांसद संकुल विकास परियोजना की परिकल्पना और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस योजना के तहत जनजातीय क्षेत्रों में लोगों को स्वरोजगार से जोड़कर पलायन रोकने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे जनजातीय बहुल राज्यों में सरकार, जनप्रतिनिधि, एनजीओ और आमजन के समन्वित प्रयासों से समग्र विकास किया जा रहा है।
विभागीय समन्वय से मिलेगा स्थायी रोजगार : कृषि मंत्री
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि विभिन्न विभागों के अधिकारी संकुल से जुड़े गांवों के विकास में अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएं। स्थानीय जरूरतों को समझते हुए कौशल विकास कर लोगों को स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
इन संकुलों में किए गए कार्यों की दी गई जानकारी
बैठक में रायगढ़ के लैलूंगा, सरगुजा के परशुरामपुर, बस्तर के बकावंड, बलरामपुर के माता राजमोहिनी देवी और केशकाल के धनोरा संकुल में योजना के तहत किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी गई।
ये रहे उपस्थित
बैठक में सांसद भोजराज नाग, चिंतामणि महाराज, राधेश्याम राठिया, देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक रेणुका सिंह, गोमती साय, प्रसाद इंडेप, कपिल सहस्त्रबुद्धे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्यजन उपस्थित थे।





