रायपुर। छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की उपलब्धियों और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और सामाजिक न्याय के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मंत्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में निवासरत 43 अनुसूचित जनजातियों एवं उनके उपसमूहों, जिनकी आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का 30.62 प्रतिशत है, के लिए विभाग कई अभिनव योजनाएं संचालित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र तथा 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां जनजातीय समुदायों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार, अधोसंरचना विकास और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देकर आदिवासी समाज को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और जनजातीय युवाओं ने शिक्षा, खेल तथा रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
मंत्री ने बताया कि आदिवासी उपयोजना के माध्यम से आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास को गति दी जा रही है। बस्तर विकास प्राधिकरण, सरगुजा विकास प्राधिकरण और नवगठित मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के जरिए स्थानीय विकास और अधोसंरचना निर्माण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
रामविचार नेताम ने कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता और सम्मान को सुरक्षित रखने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय तथा महान स्वतंत्रता सेनानी वीर नारायण सिंह की स्मृति में स्मारक-सह-संग्रहालय की स्थापना की गई है, ताकि जनजातीय इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि जनजातीय सलाहकार परिषद, आदिवासी विकास परियोजनाओं और स्वशासी समितियों के मार्गदर्शन में विभाग लगातार नई योजनाएं और नवाचार लागू कर रहा है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों के समावेशी विकास को नई दिशा मिल रही है।





