Raipur:
छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रधानमंत्री आवास योजना का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व उपमुख्यमंत्री T. S. Singh Deo ने इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वीकार किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री होने के नाते जब उन्हें लगा कि वे काम नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्होंने स्वयं विभाग छोड़ने का फैसला किया था।
टीएस सिंहदेव ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री Vijay Sharma के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बीजेपी के मंत्रीगण मुझे याद कर रहे हैं। यह सही है कि कांग्रेस सरकार में पीएम आवास नहीं बन पा रहे थे। मैं उस समय विभागीय मंत्री था। मुझे लगा कि काम नहीं कर पा रहा हूं, तो पीछे हो जाता हूं। मैंने भूपेश जी से कहा था और उन्होंने इसे स्वीकार भी किया था।”
कांग्रेस के कथित ढाई साल के फार्मूले को लेकर पूछे गए सवाल पर सिंहदेव ने कहा कि इस विषय में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “राहुल जी और विजय शर्मा की कोई बैठक होती होगी, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। ढाई साल के फार्मूले में क्या हुआ और क्या नहीं हुआ, यह किसी को नहीं पता।”
विजय शर्मा ने पत्र में क्या कहा था?
इससे पहले विजय शर्मा ने एक पत्र जारी कर कहा था कि टीएस सिंहदेव ने अपने त्यागपत्र में उल्लेख किया था कि उनकी सरकार गरीबों के लिए पक्के मकानों हेतु राशि उपलब्ध नहीं करा पा रही थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने बजट में 26,908 करोड़ रुपये का प्रावधान कर गरीबों के आवास का सपना पूरा करने की दिशा में काम किया है।
विजय शर्मा के अनुसार, “मोर आवास-मोर अधिकार” अभियान के तहत सरकार बनने के बाद ढाई वर्षों में 10.60 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच छत्तीसगढ़ ने प्रतिदिन लगभग 2,000 आवास पूर्ण कर देश में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।
अरुण साव ने साधा निशाना
उपमुख्यमंत्री Arun Sao ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि टीएस सिंहदेव का नाम इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने इस मुद्दे पर मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। साव ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में लाखों पात्र हितग्राही आवास योजना के लाभ से वंचित रहे।
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर टीएस सिंहदेव का यह बयान एक बार फिर कांग्रेस शासनकाल के दौरान इस मुद्दे पर उठे मतभेदों और राजनीतिक विवादों को चर्चा में ले आया है।





