September 6, 2026

दो कुलसचिवों के विवाद पर ABVP का आंदोलन, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में प्रशासनिक संकट

रायपुर | छत्तीसगढ़
महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ में एक साथ दो कुलसचिवों के कार्यरत होने को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जोरदार आंदोलन किया। परिषद ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कुलपति से पांच बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है।


📌 क्या है पूरा विवाद?

ABVP का आरोप है कि विश्वविद्यालय में एक ही समय पर दो कुलसचिव कार्यरत हैं, जिससे प्रशासनिक भ्रम और अव्यवस्था की स्थिति बन गई है।

  • शासन द्वारा विधिवत नियुक्त कुलसचिव यशवंत केराम पहले से पदस्थ हैं
  • वहीं नवपदस्थ आर.एल. खरे ने स्वयं को कुलसचिव बताते हुए
    विश्वविद्यालय की आधिकारिक रजिस्ट्रार ई-मेल आईडी से सभी विभागों को पदभार ग्रहण करने की सूचना भेज दी

विद्यार्थी परिषद ने सवाल उठाया है कि जब वर्तमान कुलसचिव पदस्थ हैं, तो किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आधिकारिक ई-मेल आईडी का उपयोग किस आधार पर किया गया?


🪑 केबिन कब्जे का भी आरोप

ABVP ने आरोप लगाया कि—

  • आर.एल. खरे द्वारा कुलसचिव यशवंत केराम के केबिन पर जबरन कब्जा किया गया
  • केबिन से नेम प्लेट हटाकर स्वयं की नेम प्लेट लगाई गई

परिषद के हस्तक्षेप के बाद नेम प्लेट हटवाई गई और यशवंत केराम को पुनः उनके मूल केबिन में बैठाया गया


❓ ABVP ने कुलपति से पूछे ये 5 सवाल

आंदोलन के दौरान विद्यार्थी परिषद ने कुलपति से निम्नलिखित प्रश्नों पर जवाब मांगा—

  1. वर्तमान में विश्वविद्यालय का वैध कुलसचिव कौन है?
  2. किस कुलसचिव के आदेश और हस्ताक्षर मान्य माने जाएंगे?
  3. आधिकारिक रजिस्ट्रार ई-मेल आईडी का उपयोग किस आधार पर किया गया?
  4. केबिन और नेम प्लेट परिवर्तन के लिए कौन कर्मचारी जिम्मेदार है?
  5. अब तक इस विषय में राजभवन या छत्तीसगढ़ शासन से स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं मांगे गए?

📜 आदेशों का पेंच कैसे उलझा?

ABVP ने क्रमवार स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि—

  • 23 दिसंबर 2024 : राजभवन द्वारा रामलखन खरे को उनके मूल पद पर प्रतिस्थापित किया गया
  • 6 अक्टूबर 2025 : छत्तीसगढ़ शासन ने यशवंत केराम को कुलसचिव पद पर नवीन पदस्थापना दी
  • 2 जनवरी 2026 : राज्यपाल के आदेश में आर.एल. खरे को प्रथम कुलसचिव के आदेशों का निर्माण करने का उल्लेख है,
    लेकिन यशवंत केराम को हटाने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं

इसी अस्पष्टता के कारण विश्वविद्यालय में दो कुलसचिवों की स्थिति बनी हुई है।


🗣️ ABVP का तीखा बयान

प्रदेश सह मंत्री प्रथम राव फूटाने ने कहा—

“छत्तीसगढ़ में पहले से कई विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां स्थायी कुलपति और कुलसचिव नहीं हैं, लेकिन संभवतः यह देश का पहला विश्वविद्यालय है, जहां एक ही समय में दो कुलसचिव कार्य कर रहे हैं। यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।”

उन्होंने मांग की कि तत्काल यह स्पष्ट किया जाए कि विश्वविद्यालय का वैध कुलसचिव कौन है, ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें और विद्यार्थियों के भविष्य से कोई खिलवाड़ न हो