बीजापुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) के पासेवाड़ा कोर एरिया में दो बाघों के शिकार का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस कोर एरिया में बिना अनुमति प्रवेश संभव नहीं माना जाता, वहां शिकारी पहुंचकर दो बाघों का शिकार कर गए। घटना ने टाइगर रिजर्व की निगरानी और संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह पहला मामला नहीं है जब इंद्रावती टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी वन्यजीवों के शिकार, वन्यजीव अंगों की तस्करी और जंगल में अवैध गतिविधियों को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। हालांकि विभिन्न मामलों में जांच हुई, लेकिन संरक्षण व्यवस्था को लेकर चिंताएं बनी रहीं।

करोड़ों रुपये की संरक्षण परियोजनाओं, कैमरा ट्रैप, नियमित गश्त और आधुनिक निगरानी व्यवस्था के बावजूद शिकारी कोर एरिया तक पहुंचने में सफल रहे। मामले में पांच संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और बाघों की खाल बरामद होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि वन विभाग ने अब तक मामले की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस घटना में किसी अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह की संलिप्तता सामने आती है, तो यह केवल स्थानीय सुरक्षा नहीं बल्कि राज्यों के बीच खुफिया समन्वय की भी बड़ी चुनौती होगी। हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक संदीप बल्गा ने बताया कि वन विभाग, महाराष्ट्र वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में महाराष्ट्र के कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद साझा की जाएगी।





