गरियाबंद। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपने सभी 143 फॉरेस्ट बीट्स में ‘फायर वॉचर्स’ और ‘वॉटर वॉचर्स’ की टीमों की तैनाती की है। यह पहल रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों में बसे करीब 120 गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में अहम भूमिका निभा रही है।
गर्मी में बढ़ती चुनौती, अपनाई रणनीति
गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने और जल स्रोतों के सूखने से भालू, तेंदुआ, लकड़बग्घा और हाथी जैसे वन्यजीव अक्सर गांवों की ओर रुख करते हैं। इससे मानव-वन्यजीव टकराव की आशंका बढ़ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए USTR ने एकीकृत और सक्रिय रणनीति लागू की है।
फायर वॉचर्स की सतर्क निगरानी
फायर वॉचर्स टीम नियमित पैदल गश्त करती है और जंगल की आग की निगरानी के लिए थर्मल ड्रोन तकनीक का उपयोग करती है। इस सतर्कता के चलते आग लगाने के आरोप में 23 लोगों को पकड़ा गया है, जिससे आग की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
वॉटर वॉचर्स से वन्यजीवों को राहत
जंगल के भीतर ही जल उपलब्ध कराने के लिए 750 से अधिक छोटे जल स्रोत (झिरिया) बनाए गए हैं। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में 26 सोलर पंप लगाए गए हैं। इससे वन्यजीवों को जंगल के भीतर ही पानी मिल रहा है और वे गांवों की ओर नहीं जा रहे।
अवैध शिकार पर भी नियंत्रण
इन प्रयासों से अवैध शिकार पर भी लगाम लगी है। एंटी-पोचिंग टीम ने अंतरराज्यीय शिकार नेटवर्क पर कार्रवाई की है। साथ ही सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग के जरिए सूखते जल स्रोतों और आग की संभावनाओं पर नजर रखी जा रही है।
बेहतर परिणाम सामने आए
इन समन्वित प्रयासों का असर यह रहा कि पिछले तीन गर्मी के मौसमों में USTR क्षेत्र में मानव या वन्यजीव हताहत की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है। यह उपलब्धि उस समय और महत्वपूर्ण हो जाती है जब स्थानीय लोग महुआ, साल बीज, चिरौंजी और तेंदूपत्ता जैसे लघु वनोपज का संग्रह करते हैं।
USTR का यह मॉडल पारिस्थितिक संरक्षण और स्थानीय समुदाय की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।





