July 30, 2026

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखी दुर्लभ उड़न गिलहरी, वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। हाल ही में रिजर्व क्षेत्र के वन भ्रमण के दौरान दुर्लभ इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल (भारतीय उड़न गिलहरी) दिखाई दी है। यह दुर्लभ और रात्रिचर प्रजाति मानी जाती है, जिसकी मौजूदगी को वन संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवासों के संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग की सक्रिय निगरानी और संरक्षण कार्यों के परिणामस्वरूप उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।

वन विशेषज्ञों के अनुसार इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल वास्तव में उड़ती नहीं है, बल्कि इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच मौजूद विशेष झिल्ली की मदद से यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में फिसलते हुए लंबी दूरी तय करती है। यह प्रजाति मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहती है और दिन के समय पेड़ों के खोखलों में विश्राम करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उड़न गिलहरी केवल घने, प्राकृतिक और सुरक्षित जंगलों में ही पाई जाती है। ऐसे में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इसका दिखाई देना इस बात का संकेत है कि यहां का वन क्षेत्र पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध और स्वस्थ है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन ने कहा कि उड़न गिलहरी का दिखाई देना वन विभाग के लिए गर्व का विषय है। यह रिजर्व क्षेत्र में किए जा रहे संरक्षण कार्यों की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और उनके संरक्षण के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।

वन विभाग का मानना है कि इस दुर्लभ प्रजाति के दस्तावेजीकरण से छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय समुदायों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इससे इको-पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल की मौजूदगी न केवल एक दुर्लभ वन्यजीव की उपस्थिति है, बल्कि यह राज्य में चल रहे संरक्षण प्रयासों की सफलता का भी प्रमाण है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योजनाबद्ध संरक्षण, सतत निगरानी और वन विभाग की प्रतिबद्धता से दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है।