नई दिल्ली। लॉन्च के एक दशक बाद यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम के रूप में स्थापित हो चुका है। इसने न सिर्फ भारत में भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा तय की है।
11 अप्रैल 2016 को शुरू हुए UPI ने बेहद छोटे स्तर से शुरुआत की थी, जहां पहले महीने में केवल 373 ट्रांज़ैक्शन हुए थे। लेकिन इसके बाद इसकी वृद्धि अभूतपूर्व रही। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह आंकड़ा लगभग 24,162 करोड़ ट्रांज़ैक्शन तक पहुंच गया, जो लगभग 12,000 गुना की वृद्धि को दर्शाता है।
लेन-देन के मूल्य की बात करें तो UPI ने एक और बड़ी छलांग लगाई है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां कुल ट्रांज़ैक्शन वैल्यू 0.07 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
आज UPI प्रतिदिन औसतन करीब 66 करोड़ ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस कर रहा है, जिनका दैनिक मूल्य लगभग 0.86 लाख करोड़ रुपये है। मासिक स्तर पर भी यह सिस्टम लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है—अगस्त 2025 में पहली बार 2,000 करोड़ ट्रांज़ैक्शन का आंकड़ा पार हुआ, जबकि मार्च 2026 में यह 2,264 करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
भारत के डिजिटल भुगतान सिस्टम में UPI की हिस्सेदारी लगभग 85% तक पहुंच चुकी है। यह छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कॉर्पोरेट और सरकारी सेवाओं तक हर स्तर पर भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है।
इसकी सफलता का सबसे बड़ा कारण इसकी सरलता और इंटरऑपरेबिलिटी है। शुरुआत में जहां केवल 21 बैंक जुड़े थे, वहीं अब 703 से अधिक बैंक UPI नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिससे यह देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक भी पहुंच बना चुका है।
UPI इकोसिस्टम में माइक्रो-पेमेंट्स की भूमिका बेहद अहम है। लगभग 86% मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन 500 रुपये से कम के होते हैं, जो रोजमर्रा के छोटे लेन-देन को डिजिटल बनाने में इसकी प्रभावशीलता को दिखाता है।
वैश्विक स्तर पर भी UPI को बड़ी पहचान मिली है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने इसे ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता दी है।





