वॉशिंगटन। अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलने वाली नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई कोशिश को बड़ा झटका लगा है। मैरीलैंड की एक फेडरल कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के आदेश पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा कि यह संविधान में दिए गए जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार के खिलाफ हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन के इस आदेश में कुछ विशेष मामलों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता से वंचित करने की बात कही गई थी। हालांकि, अदालत ने इस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
फेडरल जज ने लगाया प्रारंभिक प्रतिबंध
मैरीलैंड की अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेबोरा एल. बोर्डमैन ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि प्रमाणित वर्ग में शामिल बच्चे जन्म से ही अमेरिकी नागरिक हैं।
फेडरल जज ने ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश पर प्रारंभिक रोक लगा दी, जिसके जरिए जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को सीमित करने की कोशिश की जा रही थी। जज बोर्डमैन ने कहा कि संबंधित क्लास एक्शन मुकदमे के दायरे में आने वाले बच्चों पर यह नया आदेश लागू करना लगभग निश्चित तौर पर असंवैधानिक हो सकता है।
यह रोक प्रवासी अधिकार संगठनों की मांग पर लगाई गई है।
ट्रंप प्रशासन ने दिया था ‘बर्थ टूरिज्म’ रोकने का तर्क
ट्रंप प्रशासन ने अदालत में दलील दी थी कि इस आदेश का उद्देश्य ‘बर्थ टूरिज्म’ पर कार्रवाई करना है। प्रशासन का कहना था कि मुकदमा जल्दबाजी में दायर किया गया है, क्योंकि नए आदेश को लागू करने के लिए संबंधित एजेंसियों की विस्तृत गाइडलाइन अभी जारी नहीं हुई है।
सरकार की ओर से कहा गया था कि इस गाइडलाइन के जल्द जारी होने की उम्मीद है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल प्रशासन की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और आदेश पर रोक लगा दी।
20 जनवरी 2025 को पद संभालते ही उठाया था कदम
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद संभालने के बाद जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता को सीमित करने की दिशा में कदम उठाया था।
उनके आदेश का मुख्य निशाना ऐसे बच्चे बताए गए थे, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या अमेरिका के स्थायी निवासी नहीं हैं। अब मैरीलैंड की फेडरल कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन की इस नीति को कानूनी मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है।





