September 4, 2026

Vande Mataram Controversy: शर्मिला टैगोर और कंगना रनौत आमने-सामने, BJP सांसद बोलीं- ‘हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए’

नई दिल्ली। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में सियासी घमासान जारी है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो छंद गाने के प्रस्ताव के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अब इस विवाद में बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और बीजेपी सांसद कंगना रनौत भी आमने-सामने आ गई हैं।

शर्मिला टैगोर ने राष्ट्रगीत के शुरुआती दो छंदों को ही गाने की वकालत की थी। इसके बाद कंगना रनौत ने उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें ‘हिंदू-मुस्लिम सोच’ से बाहर निकलने की सलाह दी।

शर्मिला टैगोर ने क्यों जताई आपत्ति?

शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम के बाद के छंदों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भों का उल्लेख करते हुए केवल शुरुआती दो छंदों को बनाए रखने की बात कही। उनका तर्क था कि एक ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए बाद के छंदों को स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है।

शर्मिला के इसी बयान का वीडियो कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया और उन पर निशाना साधा।

कंगना रनौत ने कहा- कला और कविता को लेकर सोच छोटी नहीं होनी चाहिए

कंगना रनौत ने कहा कि वह खुश हैं कि शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम को लेकर अपनी आपत्ति खुलकर रखी, लेकिन एक कलाकार के तौर पर वह उनके नजरिए से हैरान हैं। कंगना ने कहा कि कला और कविता में शब्द अक्सर रूपक के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं और कवि या कलाकार अपनी रचनात्मकता के जरिए अलग-अलग कल्पनाओं और समानताओं का इस्तेमाल करता है।

स्वामी विवेकानंद का भी दिया उदाहरण

कंगना ने अपनी बात समझाने के लिए स्वामी विवेकानंद के विचारों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब विवेकानंद युवाओं की ‘लोहे जैसी मांसपेशियों’ और ‘स्टील जैसी हड्डियों’ की बात करते थे, तो वह शाब्दिक अर्थ में नहीं बल्कि युवाओं की शक्ति और ऊर्जा का आह्वान कर रहे थे।

कंगना ने इसी उदाहरण के जरिए कहा कि कविता और गीतों में इस्तेमाल होने वाले प्रतीकों को उसी संदर्भ में समझना चाहिए।

‘हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए’

कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर से कहा कि उन्हें हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के बावजूद लोगों को एक-दूसरे को अपना मानकर आगे बढ़ना चाहिए।

कंगना ने अपने बयान के अंत में शर्मिला टैगोर के प्रति स्नेह भी जताया और कहा कि वह उनसे प्यार करती हैं तथा उनके गले मिलने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

क्या है पूरा वंदे मातरम विवाद?

कंगना और शर्मिला टैगोर के बीच यह बयानबाजी कांग्रेस वर्किंग कमेटी के उस फैसले के बाद सामने आई है, जिसमें कांग्रेस ने 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करते हुए पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो छंद गाने का फैसला किया है।

इस मुद्दे पर बीजेपी कांग्रेस पर लगातार हमला कर रही है। 15 अगस्त के कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान भी वंदे मातरम को लेकर विवाद हुआ था। बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की संसदीय अध्यक्ष सोनिया गांधी पर राष्ट्रगीत के दौरान बातचीत करने का आरोप लगाया था और माफी की मांग की थी। कांग्रेस ने इसे महज संयोग बताया था।

इसके बाद गोवा में कांग्रेस की बैठक के दौरान भी वंदे मातरम के दो छंद गाए गए। अब CWC के दो छंद गाने के फैसले के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच विवाद और तेज हो गया है।