March 4, 2026

Waqf Board Grant Row: राष्ट्रीय पर्व पर अनुदान को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, वक्फ बोर्ड पर छिड़ी जुबानी जंग

📰 राष्ट्रीय पर्व पर अनुदान देने से मचा सियासी घमासान

15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्व मनाने के लिए छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड द्वारा अनुदान देने के फैसले पर अब राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।

एक तरफ वक्फ बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष सलीम राज ने कांग्रेस पर मुसलमानों को आतंकवादी बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए, तो वहीं दूसरी ओर पूर्व अध्यक्ष सलीम रिजवी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी है और उस पर ऐसे आरोप बेबुनियाद हैं।


🕌 मस्जिदों और मदरसों में होगा ध्वजारोहण

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सलीम राज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अक्सर मुसलमानों पर यह आरोप लगाया जाता है कि वे देश से प्रेम नहीं करते। इसी सोच को तोड़ने के लिए बोर्ड ने फैसला लिया है कि—

👉 15 अगस्त और 26 जनवरी को मस्जिदों, मदरसों और इमामबाड़ों में ध्वजारोहण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता और भाईचारा बनाए रखना ही इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य है।


💰 गरीब संस्थानों को मिलेगा 5 से 7 हजार का अनुदान

सलीम राज ने बताया कि कई दरगाह और मदरसों ने संसाधनों की कमी की बात कही थी। इस पर बोर्ड ने निर्णय लिया कि—

✅ गरीब संस्थानों को ₹5,000 से ₹7,000 तक अनुदान दिया जाएगा।
✅ ध्वजारोहण के साथ मिठाई वितरण किया जाएगा।
✅ राष्ट्रीय पर्व के महत्व पर संगोष्ठी आयोजित होगी।

इससे देशभक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश पहुंचेगा।


⚔️ कांग्रेस पर सलीम राज का हमला

कांग्रेस के विरोध पर सलीम राज ने तीखा बयान देते हुए कहा—

“कांग्रेस ने मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझा और आतंकवादी बनाने का काम किया। उन्हें देश की एकता से दूर रखा। भाजपा राष्ट्रीयता की बात करती है और जो देश से प्यार करेगा, वह राष्ट्रीय ध्वज से प्यार करेगा।”


🗣️ पूर्व अध्यक्ष सलीम रिजवी का पलटवार

वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सलीम रिजवी ने सलीम राज के बयान पर जवाब देते हुए कहा—

“यह वही कांग्रेस है जिसने आज़ादी की लड़ाई लड़ी है। उसके नेता सालों तक जेल में रहे। जिस पार्टी से सलीम राज आते हैं, वह आज़ादी से पहले अंग्रेजों का साथ देती थी। कांग्रेस ने आतंकवादी पैदा नहीं किए हैं।”


📊 बजट को लेकर भी उठाए सवाल

सलीम रिजवी ने अनुदान योजना पर सवाल खड़े करते हुए कहा—

👉 राज्य में करीब 6 हजार मस्जिदें हैं।
👉 सभी को अनुदान देने के लिए करीब ₹6 करोड़ चाहिए।
👉 जबकि वक्फ बोर्ड का कुल बजट ही करीब ₹2.25 करोड़ है।

उन्होंने कहा कि यदि अनुदान देना है तो सिर्फ मस्जिद और मदरसों को ही क्यों, बल्कि मंदिर और चर्च को भी 15 अगस्त और 26 जनवरी मनाने के लिए मदद दी जानी चाहिए।


🔥 सियासत बनाम राष्ट्रभावना

राष्ट्रीय पर्वों को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदलती नजर आ रही है। एक ओर भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे तुष्टिकरण और बजट की हकीकत से जोड़कर सवाल उठा रही है।