बालोद। लौह अयस्क खदानों से करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला दल्लीराजहरा आज गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहा है। शहर के कई वार्डों में लोगों को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते वे पीने और घरेलू उपयोग के लिए झरिया से निकलने वाले पानी पर निर्भर होने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, शहर की बहुप्रतीक्षित जल आवर्धन योजना छह वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। इस दौरान योजना की लागत 31 करोड़ रुपये से बढ़कर 43 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
कई वार्डों में पानी की भारी किल्लत
स्थानीय लोगों के अनुसार दल्लीराजहरा के वार्ड क्रमांक 10, 12 और 18 सहित कई क्षेत्रों में नलों के माध्यम से पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। कई स्थानों पर गंदा और दूषित पानी आने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे में लोग झरना मंदिर के समीप जमीन से रिसकर निकलने वाले पानी को बर्तनों में भरकर घर ले जा रहे हैं और उसी का उपयोग पीने तथा भोजन बनाने के लिए कर रहे हैं।
पानी की समस्या के कारण लोगों को रोजाना अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में यह संकट और अधिक गंभीर हो गया है, जिससे आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, आंदोलन की चेतावनी
पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता रवि जायसवाल ने इस मुद्दे को लेकर प्रशासन और नगर पालिका पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि दल्लीराजहरा को कभी “झरना दल्ली” के नाम से जाना जाता था, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि यहां के लोग खुद पानी के लिए भटक रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि केवल तीन वार्ड ही नहीं, बल्कि शहर के लगभग सभी 27 वार्ड किसी न किसी रूप में पेयजल संकट से प्रभावित हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल आवर्धन योजना का काम जल्द पूरा नहीं किया गया तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेगी।
31 करोड़ से बढ़कर 43 करोड़ पहुंची योजना
नगर पालिका अध्यक्ष के अनुसार जल आवर्धन योजना की लागत बढ़ाकर 43 करोड़ रुपये कर दी गई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके पुनर्निर्माण और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है।
नगर पालिका का दावा है कि योजना को अगले एक वर्ष के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि शहरवासियों को नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि वास्तव में लोग झरिया का पानी पीने को मजबूर हैं, तो वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था की जाएगी। साथ ही जल आवर्धन योजना में हो रही देरी और कार्यों की वर्तमान स्थिति को लेकर संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी।
लोगों का सवाल, कब मिलेगी राहत?
दल्लीराजहरा जैसे औद्योगिक और खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र में पेयजल संकट ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की परियोजना वर्षों बाद भी अधूरी है और लोग मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब शहरवासियों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि आखिर कब तक उन्हें पानी के लिए परेशान होना पड़ेगा और कब यह बहुप्रतीक्षित योजना धरातल पर पूरी तरह दिखाई देगी।





