May 14, 2026

बंगाल चुनाव से पहले घुसपैठ पर सियासत तेज, 10 दिनों में 16 बांग्लादेशी गिरफ्तार

कोलकाता/जलपाईगुड़ी।

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। जलपाईगुड़ी जिले में पिछले 10 दिनों में 16 बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में विभिन्न अभियानों के दौरान कुल 24 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा गया था, जबकि 2026 में अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चुनावी माहौल में इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है और सभी प्रमुख दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

ट्रेन में छापेमारी, 14 लोग गिरफ्तार

महीने की शुरुआत में रेलवे सुरक्षा बल ने एक सूचना के आधार पर नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस ट्रेन में छापेमारी की थी। इस दौरान 14 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें बच्चे भी शामिल थे। सभी को सरकारी रेलवे पुलिस के हवाले किया गया और बाद में अदालत में पेश किया गया।

पूछताछ में सामने आया कि ये लोग काम की तलाश में दिल्ली होते हुए कश्मीर जा रहे थे।

स्थानीय लोगों ने पकड़े संदिग्ध

जलपाईगुड़ी कोतवाली थाना क्षेत्र के मानिकगंज चौकी इलाके में दो संदिग्ध व्यक्तियों को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया। जांच में दोनों के बांग्लादेशी नागरिक होने की पुष्टि हुई।

राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप

भारतीय जनता पार्टी के जिला समिति सदस्य जीवेश दास ने कांग्रेस, सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों की नीतियों के कारण बंगाल अवैध प्रवासियों का अड्डा बन गया है।

वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता जियाउल आलम ने सवाल उठाया कि यदि घुसपैठ हो रही है तो सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल क्या कर रही है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नबेंदु मूलिक ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि राज्य सरकार सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा रही, जबकि केंद्र के अधीन BSF सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल है।

वहीं तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता सुभंकर मिश्रा ने कहा कि घुसपैठ की समस्या पहले की सरकारों के समय से चली आ रही है और 2014 के बाद इसमें और वृद्धि हुई है।

चुनाव में बड़ा मुद्दा बना घुसपैठ

बंगाल चुनाव में घुसपैठ का मुद्दा इस बार प्रमुख चुनावी एजेंडा बन गया है। भाजपा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है और दावा कर रही है कि मतदाता सूची से करीब एक करोड़ नाम हटाए गए हैं, जिनमें कई संदिग्ध बांग्लादेशी शामिल हैं।

हालांकि, अन्य दल इन दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताते हैं।

बढ़ती गिरफ्तारियों से तेज हुई बहस

चुनाव से ठीक पहले दो सप्ताह के भीतर करीब दो दर्जन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने राज्य में सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और अवैध प्रवास जैसे मुद्दों को केंद्र में ला दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सुरक्षा, पहचान और संसाधनों से जुड़ा हुआ है।