May 13, 2026

रायपुर: जंगल से आईएफएस तक का सफर, रायगढ़ के अजय गुप्ता बने संघर्ष और सफलता की मिसाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव के अजय गुप्ता ने भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में देशभर में 91वीं रैंक हासिल कर एक प्रेरणादायक इतिहास रच दिया है। कभी जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़कर परिवार की मदद करने वाले अजय आज उसी जंगल की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने की ओर बढ़ रहे हैं।

अजय का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। कच्चे मकान और सीमित संसाधनों के बीच उनका परिवार साल में छह महीने खेती और बाकी समय जंगल से तेंदूपत्ता व महुआ संग्रह कर जीवन यापन करता था। बचपन में अजय भी माता-पिता के साथ जंगल जाकर काम करते थे, लेकिन इसी संघर्ष ने उनकी सोच को मजबूत बनाया।

उन्होंने 10वीं कक्षा में 93 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी पढ़ाई की दिशा तय की। छात्रवृत्ति की मदद से आगे की शिक्षा जारी रही और उन्होंने एनआईटी रायपुर में प्रवेश प्राप्त किया। यहां से उनका आत्मविश्वास और बढ़ा और उन्होंने जीवन में बड़े लक्ष्य देखने शुरू किए।

पढ़ाई पूरी करने के बाद अजय ‘प्रदान’ संस्था से जुड़े और बस्तर में चार साल तक आदिवासी समुदायों के साथ काम किया। इस अनुभव ने उन्हें समाज और जंगल के गहरे रिश्ते को समझने का अवसर दिया और प्रशासनिक सेवा में जाने की प्रेरणा दी।

साल 2021 में उन्होंने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू की। चार बार मेन्स परीक्षा और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी सफलता हाथ नहीं लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार 2025 में उन्होंने UPSC में 452वीं रैंक हासिल कर भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए चयन प्राप्त किया।

इसके बाद आए IFS परिणाम में उन्होंने 91वीं रैंक हासिल की। उन्होंने IRS छोड़कर भारतीय वन सेवा को चुना, क्योंकि उनका कहना है कि जंगल उनके जीवन का हिस्सा रहा है और वे प्रकृति के साथ काम करना चाहते हैं।

अजय गुप्ता का कहना है कि उन्होंने कभी बड़े सपने देखने की हिम्मत नहीं की थी, लेकिन शिक्षा और मेहनत ने उनकी सोच बदल दी। वे युवाओं को संदेश देते हैं कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मेहनत और लगन से रास्ते जरूर बनते हैं।

उनके परिवार में भी शिक्षा की मजबूत मिसाल है। भाई डॉक्टर हैं और बहन इंजीनियर के रूप में कार्यरत है। अजय अपनी सफलता का श्रेय परिवार, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को देते हैं।

संकटों से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाले अजय गुप्ता की कहानी छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। यह कहानी साबित करती है कि गरीबी शुरुआत हो सकती है, लेकिन मंज़िल नहीं।