अंबिकापुर। सरगुजा जिले में सेवानिवृत्त प्रधान पाठक से रिश्वत लेने के मामले में विशेष अदालत ने बीईओ कार्यालय के क्लर्क को दोषी ठहराते हुए 3 साल के कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत ने सुनाया।
मामले के अनुसार, प्रार्थी बरनाबस मिंज (65 वर्ष), निवासी शांतिपारा, ग्राम पंचायत भटको, विकासखंड बतौली, 28 फरवरी 2017 को पूर्व माध्यमिक शाला घोघरा से प्रधान पाठक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें केवल 15 लाख रुपये ग्रेच्युटी के रूप में मिले, जबकि अवकाश नगदीकरण की 6 लाख रुपये और सातवें वेतनमान के एरियर्स की 1 लाख रुपये राशि लंबित थी।
जल्द भुगतान कराने के नाम पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बतौली में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 प्रमोद गुप्ता ने उनसे रिश्वत की मांग की। शिकायत के सत्यापन में सामने आया कि आरोपी ने अवकाश नगदीकरण का बिल बनाने के लिए 60 हजार रुपये और एरियर्स के लिए 10 हजार रुपये की मांग की थी।
इसके बाद 30 दिसंबर 2020 को एसीबी की टीम ने ट्रैप कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रमोद गुप्ता को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई बीईओ कार्यालय के स्थापना/लेखा कक्ष में की गई।
जांच पूरी होने के बाद 16 जुलाई 2021 को आरोपी के खिलाफ विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अंबिकापुर में चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए 9 अप्रैल को 3 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है, जिससे सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।





