July 23, 2026

Apollo Hospital Controversy: केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, नियमों के उल्लंघन और आयुष्मान योजना में अनियमितता की शिकायत

लोरमी।

बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद अब केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर अस्पताल प्रबंधन पर नियमों के उल्लंघन और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मरीजों को नहीं देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

लोरमी प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा में तोखन साहू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बताया कि अपोलो अस्पताल में आयुष्मान भारत और खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिलने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसे लेकर उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

अपने पत्र में केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया है कि छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद में अपोलो अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इससे पहले 11 जुलाई को रायपुर और बिलासपुर के स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अपोलो अस्पताल में छापेमार जांच की थी। जांच के दौरान मरीजों के इलाज, भर्ती प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पताल के वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई थी।

इसी बीच अस्पताल पर एक गंभीर मरीज के मामले में लापरवाही के आरोप भी लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि हैदराबाद रेफर किए गए मरीज को एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए अस्पताल ने अपनी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई, जबकि परिसर में एंबुलेंस मौजूद थी। मजबूरन परिजनों को निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करनी पड़ी।

परिजनों का यह भी आरोप है कि मरीज के साथ अस्पताल की ओर से कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ नहीं भेजा गया। एयरपोर्ट पहुंचने पर मरीज की हालत बिगड़ने के कारण एयर एंबुलेंस की मेडिकल टीम ने उसे हैदराबाद ले जाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मरीज को वापस अस्पताल लाना पड़ा।

बाद में हैदराबाद से विशेषज्ञ मेडिकल टीम बिलासपुर पहुंची। मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद उसे अगले दिन एयर एंबुलेंस से हैदराबाद रेफर किया गया। इस दौरान भी निजी एंबुलेंस का उपयोग किया गया, जिसकी चिकित्सा व्यवस्था की जांच करने के बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी गई।