बस्तर: कभी नक्सली प्रभाव के कारण प्रशासनिक पहुंच से दूर रहा बस्तर अब तेजी से बदलाव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। जिले के सुदूर क्षेत्र में बसे ‘पैरी पखना’ गांव में पहली बार कलेक्टर समेत प्रशासनिक अमले की मौजूदगी ने ग्रामीणों के लिए ऐतिहासिक पल बना दिया।

बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने कठिन रास्तों को पार करते हुए गांव तक पहुंचने का संकल्प निभाया। वे चारपहिया वाहन, मोटरसाइकिल और अंत में पैदल सफर कर गांव पहुंचे। उनका उद्देश्य स्पष्ट था—शासन की योजनाओं को उन लोगों तक पहुंचाना, जो वर्षों से मुख्यधारा से दूर थे।

दरअसल, नक्सल प्रभाव में कमी आने के बाद अब प्रशासन की पहुंच सुदूर अंचलों तक बनने लगी है। दरभा विकासखंड के ग्राम पंचायत करका के आश्रित ग्राम पैरी पखना में पहली बार जन-चौपाल का आयोजन किया गया, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
इस दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर पानी, सड़क, स्वास्थ्य और राशन जैसी बुनियादी समस्याओं को सुना। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए। लंबे समय बाद प्रशासन को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखा गया।
कलेक्टर ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि बस्तर में नक्सल प्रभाव कम होने के साथ ही अंतिम छोर तक शासन की योजनाएं और सुविधाएं पहुंचाई जाएं। इसी उद्देश्य से यह विशेष सेवा शिविर आयोजित किया गया।
बदलते बस्तर की यह तस्वीर न सिर्फ प्रशासनिक पहुंच के विस्तार को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अब विकास की धारा उन क्षेत्रों तक भी पहुंच रही है, जो लंबे समय से उपेक्षित थे।





