July 25, 2026

मां मातंगी धाम की अनोखी मान्यता: घड़ी बांधते ही शुरू होता है अच्छा समय, पूरी होती हैं मनोकामनाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मां मातंगी का एक ऐसा प्रसिद्ध धाम है, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की आस में घड़ी, घंटी, ताला और नारियल अर्पित करते हैं। रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर कुरुद विकासखंड के जीजामगांव-बिरेझर स्थित मां मातंगी देवी धाम अपनी अनोखी धार्मिक परंपराओं के कारण प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

मंदिर की सबसे खास मान्यता घड़ी बांधने की है। श्रद्धालु अपनी मन्नत मांगकर मंदिर परिसर में घड़ी बांधते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब मंदिर में बांधी गई घड़ी बंद हो जाती है, तो इसे व्यक्ति के जीवन में अच्छे समय की शुरुआत और मनोकामना पूरी होने का संकेत माना जाता है। इसी विश्वास के चलते मंदिर परिसर में चारों ओर हजारों घड़ियां बंधी हुई दिखाई देती हैं।

कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

मां मातंगी धाम में छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने और अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। मंदिर में घड़ी के साथ-साथ घंटी, ताला और नारियल बांधने की भी विशेष परंपरा है।

श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास

कोरबा से आई श्रद्धालु कमला साहू ने बताया कि यहां घड़ी, घंटी और ताला बांधने की मान्यता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं, दुर्ग से पहुंचीं ज्योति साहू ने कहा कि उन्होंने कई लोगों से मां मातंगी धाम की महिमा सुनी थी। विशेष रूप से घड़ी बांधने की अनोखी परंपरा के बारे में जानने के बाद उनकी यहां आने की इच्छा हुई।

पुजारी ने बताई परंपराओं का महत्व

मंदिर के पुजारी हरिओम महाराज के अनुसार, मां मातंगी धाम में घड़ी के अलावा घंटी और ताला बांधने की भी परंपरा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि घंटी और ताला बांधने से जीवन की बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं।

उन्होंने बताया कि लाल कपड़े में नारियल बांधकर श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं, जबकि पीले कपड़े में नारियल बांधने की परंपरा नकारात्मक प्रभावों और बुरी शक्तियों से रक्षा की कामना से जुड़ी मानी जाती है। इसी अटूट आस्था और अनोखी परंपरा के कारण मां मातंगी देवी धाम पूरे क्षेत्र में श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।