May 15, 2026

बस्तर में माओवाद अंतिम दौर में, बचे उग्रवादियों को आत्मसमर्पण का आखिरी मौका

जगदलपुर। बस्तर संभाग में माओवादी नेटवर्क अब सिमटकर अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है। बड़े कमांडरों के आत्मसमर्पण के बाद नक्सली संगठन काफी कमजोर हो गया है, हालांकि कुछ कट्टर कैडर अब भी अंडरग्राउंड रहकर सुरक्षा बलों को चुनौती दे रहे हैं।

हाल ही में माओवादी कमांडर पापाराव ने जगदलपुर में और PLGA इंचार्ज सोढ़ी केसा ने तेलंगाना में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद बस्तर में सक्रिय माओवादियों की संख्या तेजी से घटी है। इसके बावजूद कुछ गिने-चुने उग्रवादी अब भी सक्रिय हैं और हथियार डालने को तैयार नहीं हैं।

इस बीच बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने सख्त संदेश देते हुए कहा है कि बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर पर अब सीमित संख्या में ही माओवादी बचे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यधारा में लौटने का यह अंतिम अवसर है, अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज की जाएगी।

वहीं तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने भी माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील दोहराई है। उन्होंने बताया कि 2024 में जहां 125 तेलंगाना मूल के माओवादी सक्रिय थे, वहीं अब यह संख्या घटकर महज 5 रह गई है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अब भी कुछ बड़े नाम जैसे गणपति और महिला माओवादी रूपी अंडरग्राउंड हैं। ऐसे में बस्तर में माओवाद का ढांचा लगभग ढह चुका है, लेकिन अंतिम बचे उग्रवादियों के सामने आत्मसमर्पण और मुठभेड़ के बीच विकल्प बचा है।