बस्तर संभाग में एक तरफ सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में पानी संकट, बिजली कटौती, रोजगार की मांग और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे लगातार उभर रहे हैं। विकास और समस्याओं का यह दोहरा चित्र पूरे क्षेत्र की स्थिति को स्पष्ट करता है।
अटल आरोग्य लैब से स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक सुधार
जगदलपुर के महारानी जिला अस्पताल में अत्याधुनिक “अटल आरोग्य लैब” का शुभारंभ किया गया, जिसे बस्तर के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस लैब का लोकार्पण किया और इसे आम जनता के लिए समर्पित किया।
इस लैब में अब 134 प्रकार की पैथोलॉजी जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को जटिल जांचों के लिए निजी लैब या बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। लैब को हब एंड स्पोक मॉडल पर विकसित किया गया है, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेजे जा सकेंगे।
डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम के माध्यम से जांच रिपोर्ट सीधे अस्पतालों और मरीजों तक पहुंचेगी, जिससे समय की बचत होगी और इलाज प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी सेवा निशुल्क होगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बड़ा लाभ मिलेगा। हेल्थ आईडी प्रणाली के जरिए मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे डॉक्टरों को पुराने केस हिस्ट्री समझने में आसानी होगी और इलाज अधिक प्रभावी हो सकेगा।
उड़ान 2.0 के बावजूद बस्तर की हवाई कनेक्टिविटी पर सवाल
केंद्र सरकार द्वारा क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए उड़ान 2.0 योजना को मंजूरी दी गई है, जिसमें देशभर में नए एयरपोर्ट और हेलीपैड विकसित करने की बात कही गई है। छत्तीसगढ़ में भी इस योजना के तहत नए हवाई अड्डों के विकास की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि बस्तर के लोगों के लिए जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। कई प्रमुख रूट जैसे जबलपुर और बिलासपुर की उड़ानें पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि रायपुर कनेक्टिविटी भी अस्थिर बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू होनी चाहिए, ताकि व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन यात्रा को सुविधा मिल सके।
लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्र को स्थायी और मजबूत एयर नेटवर्क की आवश्यकता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि योजनाएं अक्सर कागजों में तो मजबूत दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार धीमा है।
सुकमा में 308 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण
सुकमा जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 308 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन कर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब सुकमा केवल संघर्ष का नहीं बल्कि विकास और संभावनाओं का क्षेत्र बनता जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने मिनी स्टेडियम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्षों से प्रभावित क्षेत्र अब तेजी से बदल रहा है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने जगरगुंडा और ओरछा क्षेत्रों को एजुकेशन सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा भी की।
इसके साथ ही “स्वस्थ बस्तर अभियान” की शुरुआत की गई, जिसके तहत सात जिलों के 32 ब्लॉकों में घर-घर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाएगी। गंभीर मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर बड़े अस्पतालों में किया जाएगा। दंतेवाड़ा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण कार्य की भी शुरुआत बताई गई।
नशे के खिलाफ बस्तर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
जगदलपुर में बस्तर पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गोयल धर्मशाला क्षेत्र से 54 किलो गांजा बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 26 लाख 97 हजार रुपये आंकी गई है।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि यहां नशे की बड़ी डील होने वाली है। कार्रवाई के दौरान राजस्थान के चार और सुकमा के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के पास से चार बैग में पैक गांजा, मोबाइल फोन और नकदी भी बरामद की गई।
पुलिस जांच में सामने आया है कि तस्करों ने होटल को डील प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल किया था। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक की जांच कर रही है। सभी आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
धर्म स्वातंत्र्य कानून के खिलाफ मसीही समाज का प्रदर्शन
जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में इसाई एकता मंच बस्तर संभाग द्वारा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के विरोध में बड़ा प्रदर्शन किया गया। हजारों की संख्या में लोग शांतिपूर्ण रैली के रूप में शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। उनका कहना है कि यह विधेयक अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 से 28 तक के प्रावधानों से टकराता है।
समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि इस कानून पर पुनर्विचार किया जाए और इसे लागू करने से पहले व्यापक चर्चा की जाए। प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार किया और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
रावघाट खदान क्षेत्र में आंदोलन की चेतावनी
नारायणपुर जिले के रावघाट खदान क्षेत्र में स्थानीय ग्रामीणों और श्रमिकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। राजाराव बूढ़ादेव गोद ग्राम श्रमिक विकास समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 20 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना और काम बंद आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के वादे वर्षों बाद भी पूरे नहीं हुए हैं। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। साथ ही स्कूल, अस्पताल और बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
समिति ने कहा कि कई बार प्रशासन और प्रबंधन को पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। अब ग्रामीण आंदोलन के मूड में हैं और खदान संचालन पर भी असर पड़ सकता है।
कोंडागांव में बिजली कटौती पर किसानों का विरोध
कोंडागांव जिले के दहीकोंगा वितरण केंद्र में ग्रामीण किसानों ने अनियमित बिजली कटौती के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि तय समय के अलावा भी कई बार बिजली बंद कर दी जाती है, जिससे फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है।
गर्मी के मौसम में घरेलू उपयोग जैसे पंखे और कूलर भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपकर नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग की है।
बस्तर में जल संकट गहराने लगा
गर्मी बढ़ने के साथ बस्तर जिले के ग्रामीण इलाकों में जल संकट गंभीर होता जा रहा है। कई कुएं, तालाब और नालों में पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है या पूरी तरह सूख गया है।
ग्रामीण महिलाओं को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। कुछ गांवों में हैंडपंप से भी पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल स्तर गिरना और तालाबों का संरक्षण न होना इस समस्या का प्रमुख कारण है।
केशकाल में बस-ट्रक हादसा, कई यात्री घायल
नेशनल हाईवे-30 पर केशकाल थाना क्षेत्र के मुरवेंड के पास यात्री बस और ट्रक की टक्कर में कई यात्री घायल हो गए। घायलों को कांकेर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बसों में समय की होड़ और तेज रफ्तार के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। ओवरटेकिंग और क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की समस्या भी सामने आई है।
बस्तर संभाग इस समय विकास और चुनौतियों के दोहरे दौर से गुजर रहा है। एक ओर स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे में सुधार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पानी, बिजली, रोजगार और परिवहन जैसी मूलभूत समस्याएं अभी भी बड़ी चिंता बनी हुई हैं। आने वाले समय में प्रशासन के लिए संतुलित विकास सबसे बड़ी चुनौती रहेगा।





