संजय बाजार में बदहाल व्यवस्था, गंदगी और अतिक्रमण से जूझ रहे व्यापारी
जगदलपुर: बस्तर का सबसे बड़ा और व्यस्त व्यापारिक केंद्र संजय बाजार अब अपनी पहचान खोकर अव्यवस्था का प्रतीक बनता जा रहा है। हर दिन हजारों की संख्या में ग्राहक यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाओं के अभाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बाजार के कई हिस्सों में नालियां जाम हैं, जिनसे लगातार गंदा पानी बह रहा है। इससे कीचड़ और दुर्गंध फैल रही है, जिससे दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को असुविधा हो रही है। मछली विक्रेताओं द्वारा खुले में फेंका जा रहा कचरा और सड़े-गले सब्जियों के ढेर स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। कई गलियों की हालत इतनी खराब है कि लोगों ने वहां से गुजरना तक बंद कर दिया है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि नगर निगम द्वारा बनाए गए शेड खाली पड़े हैं, जबकि सब्जी विक्रेता सड़क पर ही दुकान लगाकर आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। व्यापारी भी कचरा नालियों में डालकर समस्या को और बढ़ा रहे हैं। लंबे समय से ड्रेनेज सिस्टम सुधारने और नालियों पर जाली लगाने की मांग उठ रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है।
महुआ शराब की परंपरागत छूट अब बन रही बड़ा खतरा
बस्तर: आदिवासी समुदाय को परंपरागत रूप से दी गई महुआ शराब बनाने की छूट अब धीरे-धीरे खतरनाक स्वरूप लेती जा रही है। पहले यह परंपरा सीमित स्तर पर और सांस्कृतिक उपयोग के लिए थी, लेकिन अब यह बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार में बदलती दिख रही है।
सरकारी शराब के महंगे होने के कारण गांव-गांव में महुआ शराब का चलन तेजी से बढ़ा है। इसमें मिलावट के लिए केमिकल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। हर साल कई लोग जहरीली शराब के कारण बीमार हो रहे हैं और कुछ मामलों में मौत की खबरें भी सामने आती रही हैं।
स्थानीय समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस छूट का सबसे अधिक दुरुपयोग बाहरी लोग कर रहे हैं। आदिवासी समुदाय को इसका अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा, जबकि उनके नाम पर यह कारोबार फल-फूल रहा है।
कोंडागांव में प्रशासन अलर्ट, कानून व्यवस्था पर सख्त नजर
कोंडागांव: जिले में कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी, नियमित पेट्रोलिंग और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। शहर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर चालानी कार्रवाई की बात कही गई है।
प्रशासन ने बिना अनुमति रैली, जुलूस और आयोजनों पर भी सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
पहाड़ी मैना संरक्षण प्रोजेक्ट विफल, संसाधनों की बर्बादी
जगदलपुर: राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण के लिए शुरू किया गया प्रजनन केंद्र अब विफलता का उदाहरण बन चुका है। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद न तो पक्षियों का संरक्षण हो पाया और न ही उनकी संख्या में वृद्धि हो सकी।
एक के बाद एक मैना की मौत होने के बाद अब केंद्र लगभग बंद हो चुका है और पिंजरे खाली पड़े हैं। कांगेर घाटी जैसे प्राकृतिक आवास होने के बावजूद कृत्रिम केंद्र पर जोर देना अब सवालों के घेरे में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी मैना शांत और प्राकृतिक वातावरण में ही बेहतर तरीके से जीवित रह सकती है। कृत्रिम वातावरण में उसे रखना उसके स्वभाव के विपरीत है, जिससे यह परियोजना सफल नहीं हो सकी।
तेंदूपत्ता सीजन से ग्रामीणों में उत्साह, आय बढ़ने की उम्मीद
बीजापुर: इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण को लेकर ग्रामीणों और संग्राहक परिवारों में नई उम्मीद जगी है। नक्सल प्रभाव में कमी और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के कारण इस बार अधिक संग्रहण की संभावना जताई जा रही है।
सरकार द्वारा प्रति बोरा बेहतर मूल्य मिलने से ग्रामीणों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है। 75 समितियों के माध्यम से लाखों मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदी का लक्ष्य रखा गया है।
पिछले वर्ष बेमौसम बारिश के कारण संग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा था, लेकिन इस बार मौसम अनुकूल रहने की संभावना है। यह सीजन बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
बिजली संकट से ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित
कोंडागांव: जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। लगातार लो वोल्टेज और बार-बार बिजली कटौती के कारण लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
किसानों के पंप सही से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसलें सूखने की कगार पर पहुंच रही हैं। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घरेलू कार्य भी बाधित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने कई बार विद्युत विभाग को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
इंद्रावती नदी पर पुल नहीं, 25 गांव अब भी परेशान
जगदलपुर: इंद्रावती नदी पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से लंबित है, जिसके कारण करीब 25 गांवों के लोग आज भी जोखिम भरे आवागमन के लिए मजबूर हैं।
बरसात के बाद छह महीने तक नदी पार करना बेहद कठिन हो जाता है। पहले नाव की सुविधा थी, लेकिन अब वह भी बंद हो चुकी है। सड़कें बनने के बावजूद पुल का अभाव विकास योजनाओं की अधूरी तस्वीर पेश करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब यह केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन की जरूरत बन चुकी है।
अवैध रेत खनन पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई
दंतेवाड़ा: जिले में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कई वाहनों को जब्त किया है।
निरीक्षण के दौरान बिना अनुमति रेत परिवहन करते पाए गए वाहनों पर तत्काल कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, शिक्षक गिरफ्तार
कोंडागांव: धनोरा थाना क्षेत्र में एक शिक्षक को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और न्यायालय में पेश किया।
यह घटना समाज में भरोसे के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।





