July 25, 2026

Dhamtari Alert: धमतरी में 180 दिनों में 174 आत्महत्याएं, नशा और डिप्रेशन मुख्य वजह; पढ़ें विशेषज्ञों की राय

धमतरी |

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से आत्महत्या के लगातार बढ़ते आंकड़े बेहद डरावने और चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। वर्ष 2026 के शुरुआती 6 महीनों (180 दिनों) के भीतर केवल धमतरी जिले में 174 लोगों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है। यानी लगभग हर दिन एक व्यक्ति आत्महत्या के लिए मजबूर हुआ है।

आंकड़ों का कड़वा सच: हर दिन औसतन एक मौत

  • 180 दिन, 174 मौतें: यदि 180 दिनों में से सिर्फ 6 दिनों को छोड़ दिया जाए, तो औसतन हर रोज एक आत्महत्या दर्ज हुई है।
  • हर वर्ग प्रभावित: कदम उठाने वालों में 19 वर्ष के युवाओं से लेकर 65 वर्ष के बुजुर्ग शामिल हैं। इसमें गरीब और संपन्न दोनों वर्गों के लोग हैं।
  • तरीका: 95% मामलों में लोगों ने फांसी लगाकर जान दी, जबकि 5% मामलों में जहर का सेवन किया गया।

नशा और डिप्रेशन: 90% मामलों में दिखा नशे का असर

मामलों की पड़ताल से पता चलता है कि पारिवारिक कलह, प्रेम प्रसंग और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर मुख्य वजहें रही हैं। लेकिन सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 90% मामलों में पीड़ित घटना के समय नशे में थे।

सीएसपी अभिषेक चतुर्वेदी का बयान: “चिकित्सीय जानकारों का मानना है कि अत्यधिक नशा व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making Power) को कमजोर कर देता है। इस कारण व्यक्ति अत्यधिक तनाव या गुस्से में आकर ऐसा खौफनाक कदम उठा लेता है। जिले के 13 थानों और 2 चौकियों के तहत शहरी व सेमी-अर्बन क्षेत्रों से मामले अधिक आ रहे हैं।”

मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी तोड़ना बेहद जरूरी

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रीति चांडक के अनुसार:

  1. मानसिक अस्वस्थता पर खुलकर बात करें: जिस तरह शारीरिक बीमारी होने पर हम डॉक्टर के पास जाते हैं, उसी तरह मानसिक तनाव होने पर काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना अनिवार्य है।
  2. संकेत पहचानें: यदि आसपास का कोई व्यक्ति निराशावादी बातें कर रहा हो या खुद को लंबे समय से अलग-थलग (अकेला) रख रहा हो, तो उनसे बातचीत करें।
  3. बिना जज किए सुनें: ऐसे व्यक्ति की बातों को बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनें और जरूरत महसूस होने पर उन्हें तुरंत विशेषज्ञ के पास ले जाएं।

सहायता कहाँ से लें?

यदि आप या आपके पहचान का कोई व्यक्ति तनाव, डिप्रेशन या किसी मानसिक समस्या से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें।

  • सहायता के लिए संपर्क करें: तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन, काउंसलर्स या राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन पर संपर्क करें।