बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गोवंश की जब्ती और उनकी अंतरिम कस्टडी से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर सुनवाई शुरू कर दी है। कोर्ट यह तय करेगा कि गोवंश तस्करी या अवैध परिवहन के मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद जब्त मवेशियों को अंतरिम कस्टडी में सौंपने का अधिकार आपराधिक अदालतों को है या नहीं, अथवा छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 के विशेष प्रावधान इस अधिकार को सीमित करते हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे महत्वपूर्ण कानूनी विषय माना। अदालत ने मामले में सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना आफरीन अली को न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया है। साथ ही राज्य के महाधिवक्ता विवेक शर्मा को भी इस मामले में विशेष सहयोग देने के लिए अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
2021 में लार्जर बेंच को भेजा गया था मामला
हाईकोर्ट ने 18 मार्च 2021 को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न लार्जर बेंच के समक्ष भेजा था। प्रश्न यह है कि यदि पुलिस गोवंश से जुड़े किसी मामले में मवेशियों को जब्त करती है, तो क्या मजिस्ट्रेट कोर्ट उन्हें अंतरिम रूप से किसी व्यक्ति को सुपुर्द कर सकता है, या विशेष कानून के कारण ऐसा करने का अधिकार नहीं है।
आरोपी बरी, लेकिन कानूनी सवाल अब भी बरकरार
2 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता मोहम्मद वासिम कुरैशी के अधिवक्ता ऋषिकांत महोबिया ने अदालत को बताया कि मूल आपराधिक मामले में ट्रायल पूरा हो चुका है और याचिकाकर्ता दोषमुक्त हो चुके हैं। इसलिए व्यक्तिगत रूप से इस याचिका में अब कुछ शेष नहीं बचा है।
हालांकि, डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि भले ही याचिकाकर्ता बरी हो गए हों, लेकिन लार्जर बेंच के समक्ष भेजे गए मूल कानूनी प्रश्न का समाधान आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में एक स्पष्ट कानूनी मार्गदर्शन उपलब्ध हो सके।
महाधिवक्ता ने मांगा समय
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने अदालत को बताया कि मामला जटिल कानूनी पहलुओं से जुड़ा है और विस्तृत अध्ययन व तैयारी के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। अदालत ने उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए सुनवाई 15 जुलाई तक स्थगित कर दी।
साथ ही हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि न्याय मित्र नौशीना आफरीन अली को याचिका, उससे जुड़े सभी दस्तावेज और अब तक की पूरी आदेश-पत्रिका (ऑर्डर शीट) उपलब्ध कराई जाए, ताकि अगली सुनवाई में मामले पर व्यापक रूप से विचार किया जा सके।





