July 31, 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जंगलों के 10 किमी दायरे में बंद रहेंगी आरा मिलें, 19 याचिकाएं खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों के आसपास संचालित आरा मिलों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस निर्णय को सही ठहराया है, जिसके तहत अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से हवाई दूरी के 10 किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने इस मामले में दायर सभी 19 याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि “हमें दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए।” कोर्ट ने माना कि पर्यावरण संरक्षण और वन संपदा की सुरक्षा के लिए सरकार का 10 किलोमीटर के बफर जोन का निर्णय उचित और आवश्यक है।

दरअसल, राज्य सरकार ने 25 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान अधिनियम, 1984 की धारा 5(1) के तहत अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद वन विभाग ने इस दायरे में संचालित सभी आरा मिलों को बंद करने और उनके लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे।

सरकार के इस निर्णय को चुनौती देते हुए कई आरा मिल संचालकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। उनका तर्क था कि इस आदेश से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। हालांकि, हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार के फैसले को वैध ठहराते हुए सभी 19 याचिकाओं को खारिज कर दिया।

इस फैसले के बाद अब अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सभी आरा मिलें बंद रहेंगी और इस क्षेत्र में नए लाइसेंस जारी करने या पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा।