May 15, 2026

मस्तूरी गोलीकांड: ‘बेंच हंटिंग’ पर हाईकोर्ट सख्त, सह-आरोपी के आचरण को बताया निंदनीय

बिलासपुर: मस्तूरी गोलीकांड के एक सह-आरोपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे ‘बेंच हंटिंग’ का स्पष्ट मामला बताया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के साथ ही महाधिवक्ता कार्यालय के एक पूर्व विधि अधिकारी के आचरण पर भी नाराजगी जताई है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत तथ्यों से साफ है कि यह बेंच हंटिंग का मामला है, जिसे किसी भी स्थिति में प्रोत्साहित या स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सह-आरोपी देवेश सुमन उर्फ निक्कू के आचरण को अत्यंत निंदनीय बताते हुए कहा कि उसे किसी भी हालत में क्षमा नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि वकील रणबीर सिंह मरहास द्वारा पूछे गए स्पष्ट प्रश्नों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिससे याचिका की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

मामले में रिकॉर्ड के अनुसार, एक नाबालिग सह-आरोपी ने अपनी रिहाई के लिए किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 102 के तहत आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जिसे 3 फरवरी 2026 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद अन्य सह-आरोपियों—अकबर खान, मोहम्मद मतीन और मोहम्मद मुस्तकिन उर्फ नफीस—द्वारा क्रमशः अलग-अलग जमानत याचिकाएं दायर की गईं, जो एक ही बेंच के समक्ष सूचीबद्ध होती रहीं।

लगातार एक ही बेंच के समक्ष याचिकाएं लिस्ट होने और अलग-अलग सह-आरोपियों द्वारा समान प्रकृति की याचिकाएं दाखिल करने को लेकर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और इसे न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के रूप में देखा।

क्या है बेंच हंटिंग?
‘बेंच हंटिंग’ (Bench Hunting) का अर्थ है किसी मामले में अपने पक्ष में फैसला पाने के उद्देश्य से उसे किसी विशेष जज या बेंच के सामने सूचीबद्ध कराने की कोशिश करना। यह न्याय प्रणाली की निष्पक्षता को प्रभावित करता है और न्यायिक अखंडता के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।