May 16, 2026

शराब घोटाला: EOW का 9वां पूरक चालान पेश, सौम्या चौरसिया समेत कई पर गंभीर आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए रायपुर की स्पेशल कोर्ट में 9वां पूरक चालान पेश किया है। करीब 1500 पन्नों के इस चालान में कई बड़े नामों के खिलाफ गंभीर आरोपों को विस्तार से रखा गया है।

51 आरोपियों तक पहुंची जांच

जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक इस मामले में कुल 51 आरोपियों के खिलाफ अभियोग पत्र दाखिल किया जा चुका है। इससे घोटाले के बड़े नेटवर्क और इसकी गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सौम्या चौरसिया पर संरक्षण देने का आरोप

तत्कालीन उप सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय सौम्या चौरसिया पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शराब सिंडिकेट को संरक्षण, समन्वय और प्रशासनिक सुविधा प्रदान की।

जांच में यह भी सामने आया है कि उनकी भूमिका से शासन के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा और अवैध लाभ अर्जित किया गया।

केके श्रीवास्तव की भूमिका

कृष्ण कुमार श्रीवास्तव (केके श्रीवास्तव) पर आरोप है कि उन्होंने अवैध नगदी के लेन-देन, नेटवर्क के संचालन और धन के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई।

जांच एजेंसी के मुताबिक, वे अवैध उगाही, धन के परिवहन, निवेश और खपाने जैसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे।

देवेंद्र डडसेना पर रकम संभालने का आरोप

देवेन्द्र डडसेना, जो राजीव भवन का पूर्व एकाउंटेंट रहा है, पर आरोप है कि उसने अवैध रकम को प्राप्त करने, सुरक्षित रखने और निर्देशानुसार आगे पहुंचाने का काम किया।

जांच में उसे इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र का सक्रिय सहयोगी माना गया है।

जांच अभी जारी, और खुलासे संभव

EOW/ACB की जांच अभी भी जारी है और एजेंसी इस पूरे सिंडिकेट की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

क्या है पूरा शराब घोटाला?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जांच कर रहा है। FIR के अनुसार, यह घोटाला 3200 करोड़ रुपये से अधिक का बताया गया है।

जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल तीन हिस्सों—A, B और C—में संचालित किया गया:


A: डिस्टलरी से कमीशन वसूली

डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपये तक कमीशन वसूला गया। नुकसान की भरपाई के लिए शराब की कीमतें बढ़ाई गईं और ओवरबिलिंग की कथित छूट दी गई।


B: नकली होलोग्राम का खेल

अतिरिक्त शराब बनवाकर उस पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री कराई गई।

जांच में 40 लाख पेटी से अधिक शराब की बिक्री के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।


C: सप्लाई जोन में हेरफेर

देशी शराब की सप्लाई के लिए बनाए गए जोन में कथित हेरफेर कर कमीशन के आधार पर टेंडर दिए गए।

EOW के अनुसार, तीन वित्तीय वर्षों में करीब 52 करोड़ रुपये की अवैध उगाही के साक्ष्य मिले हैं।


बड़े नेटवर्क की जांच जारी

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस घोटाले में कई शासकीय, गैर-शासकीय और राजनीतिक लोगों के शामिल होने की आशंका है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे और चार्जशीट पेश की जा सकती हैं।