छत्तीसगढ़। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों और उद्योगों के समन्वित विकास की नीति अब जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम देती नजर आ रही है। श्रम विभाग की योजनाओं में श्रमिकों को आर्थिक इकाई से आगे बढ़ाकर समाज की आधारशिला मानते हुए उनके जीवन में स्थायित्व, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
12 अप्रैल के विशेष अवसर पर उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के योगदान को रेखांकित किया गया। उनके नेतृत्व में राज्य ने श्रमिक कल्याण, औद्योगिक विकास और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।
राज्य सरकार की नई उद्योग नीति (2024-2030) के तहत समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही श्रमिकों के बच्चों को उत्कृष्ट विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि और श्रमिक परिवारों के सामाजिक उत्थान के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। पिछले दो वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये सीधे श्रमिकों के खातों में हस्तांतरित किए गए हैं। वहीं ‘शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ के तहत मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जो श्रमिक हितैषी शासन की मिसाल है।
औद्योगिक क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन और नए उद्योगों की स्थापना के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। नवा रायपुर में देश का पहला एआई डाटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में पहल, सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में निवेश तथा स्टार्टअप नीति का क्रियान्वयन राज्य को आधुनिक औद्योगिक हब के रूप में स्थापित कर रहा है।
प्रशासनिक सुधारों के तहत ई-निविदा प्रणाली और सिंगल विंडो सिस्टम लागू किए गए हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। साथ ही महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और दूरस्थ क्षेत्रों में औद्योगिक विकास जैसी पहलें सामाजिक समावेशन को मजबूत कर रही हैं।
सरकार का मानना है कि संवेदनशील नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आमजन के जीवन में वास्तविक बदलाव लाता है।





