Raipur News : रायपुर। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और जागरूकता को मजबूत बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ में “रक्षक” पाठ्यक्रम को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। इस पहल को अंतिम रूप देने के लिए रायपुर में विश्वविद्यालय स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि “रक्षक” पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक अभियान है। उन्होंने जोर दिया कि इस पहल को प्रभावी तरीके से लागू कर आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और जागरूक बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी और अंजनेय यूनिवर्सिटी के कुलपति, कुलसचिव और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने पाठ्यक्रम की उप-इकाइयों पर विस्तार से चर्चा कर सुझाव दिए और इसे व्यवहारिक रूप से अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य “रक्षक” पाठ्यक्रम के तहत तैयार मॉड्यूल्स को अंतिम रूप देना था, ताकि इसे आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू किया जा सके। विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम की संरचना, उपयोगिता और कार्यान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए।
सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इस पहल को समय की जरूरत बताते हुए इसके सफल क्रियान्वयन के लिए पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। आयोग का मानना है कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे समाज में बच्चों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार भूमिका निभा सकेंगे।
गौरतलब है कि “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को राज्य में लागू करने के लिए पहले ही सरकार और उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच एमओयू किया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल संरक्षण के मुद्दों से जोड़ना और समाज में संवेदनशीलता विकसित करना है, ताकि बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सके।





