रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। साय कैबिनेट की बैठक में UCC का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। समिति राज्य में UCC का ड्राफ्ट तैयार करेगी और विभिन्न पक्षों से सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस निर्णय का विरोध करते हुए इसे आदिवासी अधिकारों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि UCC लागू होने से आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में पहले से ही पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के तहत विशेष अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या UCC लागू होने के बाद इन प्रावधानों में कोई बदलाव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी हितों के खिलाफ किसी भी कानून का विरोध करेगी।
उन्होंने आगे कहा कि संरक्षित जनजातियों जैसे बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया सहित अन्य समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा पर सरकार को स्पष्ट रुख रखना चाहिए।
वहीं, कैबिनेट निर्णय के अनुसार UCC समिति नागरिकों, विशेषज्ञों और संगठनों से सुझाव लेकर ड्राफ्ट तैयार करेगी। इसके बाद इसे मंत्रिपरिषद में रखा जाएगा और फिर विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ लागू होने के कारण कानूनी प्रक्रिया में असमानता और जटिलता आती है, जिसे दूर करने के लिए समान नागरिक संहिता आवश्यक है। इससे न्याय प्रणाली को सरल, एकरूप और अधिक पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।





